अमेरिका की अपीलीय अदालत ने फलस्तीनी समर्थक कार्यकर्ता महमूद खलील की रिहाई का आदेश रद्द कर दिया। इस फैसले से अमेरिका में एक बार फिर अभिव्यक्ति की आजादी पर बहस तेज हो गई है। एक तरफ ट्रंप प्रशासन ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा की बड़ी जीत बताया, जबकि मानवाधिकार संगठनों ने फैसले को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर चोट करार दिया है।
अमेरिका की थर्ड सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स के फैसले ने फलस्तीनी समर्थक कार्यकर्ता महमूद खलील के मामले को एक बार फिर सियासी और कानूनी बहस के केंद्र में लाकर खड़ा किया है। अपीलीय अदालत ने महमूद की रिहाई के आदेश को रद्द करते हुए ट्रंप प्रशासन को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने दो के मुकाबले एक के बहुमत से निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया है। इस फैसले को एक तरफ जहां ट्रंप प्रशासन ने अपनी जीत बताया है। वहीं दूसरी ओर नागरिक अधिकार संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर गंभीर आघात करार दिया है।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने बताया बड़ी जीत
इस फैसले के बाद अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बयान जारी करते हुए कहा कि यह ट्रंप प्रशासन की एक बड़ी जीत है और अमेरिका अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि वह आतंकवादी संगठनों के समर्थकों को देश के भीतर किसी भी तरह की गतिविधियों की अनुमति नहीं देगी।
जज ने बहुमत के फैसले से जताई असहमति
इस मामले में एक जज ने बहुमत के फैसले से असहमति जताई। असहमति जताने वाली जज ने कहा कि इमिग्रेशन कोर्ट के पास संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मामलों की पूरी तरह सुनवाई करने की क्षमता नहीं है। उन्होंने यह भी माना कि खलील ने अपनी हिरासत के दौरान गंभीर और अपूरणीय नुकसान झेला है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
न्यूयॉर्क के मेयर ने फैसले से जताई चिंता
यॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने भी कोर्ट के इस फैसले पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि महमूद खलील की गिरफ्तारी राजनीतिक दमन का उदाहरण है और उन्हें स्वतंत्र रहना चाहिए। नागरिक स्वतंत्रता संगठनों का कहना है कि यह फैसला फेडरल अदालतों की भूमिका को कमजोर करता है और सरकार को असहमति की आवाजों को दबाने का अधिक अधिकार देता है। दूसरी ओर कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि खलील की कानूनी टीम अब पूरे थर्ड सर्किट कोर्ट में पुनर्विचार की मांग कर सकती है और इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच सकता है।
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कौन है महमूद खलील, जानिए
खलील ने अपनी गिरफ्तारी को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है। उनका कहना है कि उन्हें सिर्फ अपने विचार व्यक्त करने की वजह से हिरासत में लिया गया। हिरासत के दौरान वे अपने पहले बच्चे के जन्म के समय भी परिवार के साथ नहीं रह सके, जिसे उन्होंने अपने जीवन का सबसे दर्दनाक अनुभव बताया।
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