अमेरिका की एक अदालत ने भारतीय मूल की महिला पर लगे हत्या के दोष को गैर इरादतन हत्या में बदल दिया है। महिला पर डे-केयर के दौरान एक बच्चे की हत्या का दोष साबित हुआ था। मीडिया रिपोर्टस के अनुसार पल्लवी मचरला के खिलाफ ऐसे कोई सबूत नहीं मिले हैं, जिनसे ये साबित हो सके कि उसका बच्चे को मारने का कोई इरादा था। अदालत में जज केनेथ फिशमैन ने कहा कि मई में 44 साल की इस महिला को ज्यूरी ने हत्या का दोषी पाया था। जो कि पूरी तरह ठीक नहीं था। जज ने हत्या की सजा को गैर इरादतन हत्या में बदल दिया है।
इस मामले में चार सप्ताह तक परीक्षण किया गया, जिसमें कई विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया। इन सभी ने रिद्धिमा धेकाने (बच्चे) की मार्च 2014 में हुई मौत को लेकर अलग-अलग थियोरी बताई थी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार घटना मचरला के बर्लिंग्टन स्थित घर में हुई थी, जहां वह डे-केयर सेंटर चलाती थी।
फिशमैन ने फैसला सुनाते हुए कहा कि जो भी सबूत मिले हैं, उनसे ये साबित नहीं होता कि मामला हत्या का था। फिशमैन ने कहा कि मौजूदा सबूतों के आधार पर अदालत महिला को हत्या करने का दोषी नहीं मान सकती। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कहा कि भारत में मेडिकल डॉक्टर रही मचरला को तब गुस्सा आ गया था, जब बच्चा उन्हें परेशान करने लगा। वहीं अपने बचाव में मचरला ने कहा है कि बच्चे ने अपने घर से आए एपलसॉस के खाने के बाद उल्टी करना शुरू कर दिया और थोड़ी देर बाद उसने सांस लेना भी बंद कर दिया था।
हालांकि फिशमैन ने दोष को पलटने और मचरला को बरी करने के प्रस्ताव का खंडन किया। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे ये साबित हो सके कि मचरला का इरादा बच्चे के साथ कुछ गलत करने का था। यह भी देखा गया कि जब बच्चे ने सांस लेना बंद कर दिया तो मचरला ने उसकी सांस वापस लाने की पूरी कोशिश की। साथ ही बच्चों के प्रति अतीत में भी मचरला ने कभी हिंसक व्यवहार नहीं किया है।