बांग्लादेश में लगातार हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा। उपद्रवी कभी मंदिरों तो कभी उनके घरों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। कुछ दिनों पहले हिंदुओं के जाने-माने नेता चिन्मय कृष्ण दास को भी गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद से यहां लगातार तनाव जारी है। इस पूरे मामले पर अमेरिकी सांसद ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि बांग्लादेश को हिंदू विरोधी हिंसा को समाप्त करना चाहिए। साथ ही यह भी कहा कि मौलिक स्वतंत्रता का सम्मान होना चाहिए।
मानवाधिकारों को बनाए रखने का किया आह्वान
अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने चिन्मय दास की गिरफ्तारी के बाद बांग्लादेश में हाल ही में फैली अशांति पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बांग्लादेशी सरकार से मानवाधिकारों को बनाए रखने, कानूनी सुरक्षा की गारंटी देने और हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समूहों के खिलाफ लक्षित हिंसा को समाप्त करने का आग्रह किया।
हिंसा स्वीकार नहीं की जा सकती: सांसद
उन्होंने कहा, 'बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य के खिलाफ जारी हिंसा स्वीकार नहीं की जा सकती है। इसे तुरंत रोका जाना चाहिए। मैं बांग्लादेश सरकार से शांतिपूर्वक तनाव कम करने के लिए निर्णायक कदम उठाने का आग्रह करता हूं।'
मौजूदा तनाव को कम करना जरूरी
इलिनोइस के सांसद ने शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शनों की सुरक्षा के लिए बांग्लादेश की आवश्यकता पर प्रकाश डाला और यह सुनिश्चित किया कि गिरफ्तार व्यक्तियों को उचित कानूनी प्रतिनिधित्व मिले। उन्होंने कहा, 'बांग्लादेश सरकार को शांतिपूर्ण विरोध तथा उचित कानूनी प्रतिनिधित्व के अधिकारों सहित मानवाधिकारों और मौलिक स्वतंत्रता को बनाए रखना व उनकी रक्षा करनी चाहिए।' उन्होंने कहा कि मौजूदा तनाव को कम करने के लिए इस तरह के उपाय महत्वपूर्ण हैं।'
चिन्मय दास की गिरफ्तारी के बाद से बवाल
गौरतलब है कि 26 नवंबर को हिंदू आध्यात्मिक नेता चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी की जमानत याचिका खारिज होने के बाद उनके समर्थकों ने जेल ले जा रहे जेल वैन को रोक दिया था। इस घटना के दौरान एक सरकारी वकील की मौत हो गई थी। दास को देशद्रोह के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। बाद में एक अदालत ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था, जिससे राजधानी ढाका और बंदरगाह शहर चटगांव सहित विभिन्न स्थानों पर समुदाय के सदस्यों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था।
अन्य घटनाक्रमों में बांग्लादेश के प्रमुख शहरों में अदालत परिसर में अफरातफरी नजर आई, जबकि अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग पार्टी के कई नेताओं और करीबी सहयोगियों पर पुलिस सुरक्षा के बावजूद अदालत में पेशी के दौरान भीड़ ने हमला किया।