Donald Trump: कैपिटल हिल्स हिंसा
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अमेरिका में बहुत से राष्ट्रपति आए और गए, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ऐसी शख्सियत रहे हैं कि हर वक्त किसी न किसी वजह से चर्चा में बने रहते हैं। मामला कैपिटल हिल्स (Capitol Hill) हिंसा से जुड़ा हो या जबरन खुद को दोबारा जीता हुआ साबित करने का, या फिर एक बार फिर बाइडन के बाद वापसी की जोड़तोड़ का, उनकी लोकप्रियता बढ़ती हुई ही नज़र आती है।
आपको याद होगा, अमेरिकी चुनाव के नतीजों के बाद जैसे जैसे ट्रंप हार रहे थे, उनकी जिद और समर्थकों का गुस्सा फूटने लगा था। वो मानने को तैयार नहीं थे कि कुर्सी उनके हाथ से जा रही है। नतीजा हुआ 6 जनवरी 2021 को अमेरिकी संसद यानी कैपिटल हिल पर ट्रंप समर्थकों का ऐसा हमला जैसा अमेरिकी इतिहास में कभी नहीं हुआ था। मामले की सुनवाई चल रही है। इन अठारह महीनों में आठवीं बार इस मामले की सुनवाई हो चुकी है। इस बार मामले की सुनवाई कर रही अमेरिकी कांग्रेस कमेटी ने हिंसा के लिए सीधे सीधे पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप को जिम्मेदार ठहरा दिया।
कमेटी ने हिंसा के दौरान कार्रवाई न करने की ट्रंप की योजना को योजनाबद्ध बताया। 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों को पलटने के लिए ट्रंप ने क्या क्या किया, इस बारे में कमेटी के चेयरमैन बेनी थाम्पसन ने साफ कहा कि ट्रंप ने अराजकता और भ्रष्टाचार का रास्ता चुना, झूठ बोला और पद का दुरुपयोग किया। और तो और लोकतांत्रिक संस्थानों को बरबाद करने की कोशिश की।
कमेटी को ये तमाम सबूत ट्रंप के सहयोगियों ने ही दिए। तत्कालीन उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मैथ्यू पोटिंगर हों या प्रेस सचिव सारा मैथ्यूज़। दोनों ने ही हिंसा के बाद ट्रंप का साथ छोड़ दिया था और इस्तीफा दे दिया था। इनके अलावा कई और अन्य अफसरों की भी गवाही हुई जो ट्रंप के कार्यकाल में प्रमुख भूमिकाओं में थे। इस दौरान जो तथ्य सामने आए उसके मुताबिक न तो ट्रंप किसी की कोई बात सुन रहे थे, न हिंसा रोकने के लिए दिए गए किसी भी सुझाव का जवाब दे रहे थे, सिर्फ बैठकर टीवी पर हिंसा का लाइव वीडियो देख रहे थे। यहां तक कि ट्रंप की नज़र में ये सारे हिंसक प्रदर्शनकारी देशभक्त थे और लगातार कह रहे थे कि ये दिन इतिहास में याद रखा जाएगा।
हालांकि ट्रंप समर्थक कमेटी के इन तमाम आरोपों को झूठा और मनगढ़ंत बता रहे हैं और दावे के साथ कह रहे हैं कि बाइडन प्रशासन अमेरिका को बरबाद करने में लगा है। बाइडन हर मोर्चे पर नाकाम साबित हुए हैं और मिड टर्म में ही इस बात का सबूत मिल जाएगा कि वापसी ट्रंप की ही होगी।