अमेरिका-चीन के बीच उच्च स्तरीय बैठक में जहां शुक्रवार को दोनों देश भिड़ बैठे, वहीं शनिवार को भी संयुक्त राष्ट्र में नस्लवाद के मुद्दे पर दोनों में टकराव दिखा।
अमेरिका ने उइगर मुस्लिमों व अल्पसंख्यकों के खिलाफ चीन पर जनसंहार और मानवता के विरुद्ध अपराध के आरोप लगाए वहीं चीन ने अमेरिका पर भेदभाव, नफरत और अफ्रीकी तथा एशियाई मूल के लोगों की बर्बर हत्या का आरोप लगाया।
दोनों देशों के बीच संयुक्त राष्ट्र महासभा में अंतरराष्ट्रीय नस्ली भेदभाव उन्मूलन दिवस समारोह के दौरान यह टकराव देखने को मिला। यहां अमेरिकी राजदूत लिंडा थॉमस ग्रीनफील्ड ने यह कहकर मामला भड़का दिया कि गुलामों के वंशज दक्षिण में बढ़ रहे थे, इसने जातिवाद पैदा किया।
ग्रीनफील्ड ने असामान्य रूप से कहा, गुलामी अमेरिका का मूल पाप है, इसने हमारे संस्थापक दस्तावेजों और सिद्धांतों में श्वेत वर्चस्व तथा अश्वेतों के प्रति हीन भावना डाली। यह गुलामी दुखद रूप से आज भी दुनिया के हर कोने में है।
इसी तरह नस्लवाद भी आज एक चुनौती है। उन्होंने कहा, चीन ने शिनजियांग में उइगरों एवं धार्मिक अल्पसंख्यकों का जनसंहार करके मानवता के विरुद्ध अपराध किए। इस पर चीनी उप राजदूत दाइ बिंग ने कहा ये आरोप राजनीति से प्रेरित हैं। उन्होंने अमेरिका पर चीनी मामलों में दखल का आरोप लगाते हुए इसे झूठ का पुलिंदा कहा।
अमेरिका-चीन में नोंकझोंक के बीच अलास्का बैठक संपन्न
अमेरिका-चीन के शीर्ष राजनयिकों के बीच अलास्का में हुई दो दिनी बैठक शनिवार (भारतीय समयानुसार) पूरी हुई। दोनों देशों में जारी व्यापार, दक्षिण चीन सागर, हांगकांग तथा शिनजियांग प्रांत में मानवाधिकारों समेत कई मुद्दों पर टकराव के बीच इस बैठक में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने चीन पर ‘दिखावे’ का आरोप लगाया। बीजिंग ने भी अमेरिका पर ‘साजिश की बू’ का आरोप मढ़ा।
विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने बैठक के बाद कहा, हमें रक्षात्मक प्रतिक्रिया मिली। हम अपनी नीतियों तथा दुनिया के विचार भी स्पष्ट रूप से रखना चाहते थे, और हमने वो भी किया।
वहीं चीनी कम्युनिस्ट पार्टी में विदेश मामलों के प्रमुख यांग जिएची ने कहा कि मतभेदों को दूर करने का एकमात्र तरीका संवाद है और बीजिंग का किसी भी मुद्दे पर पीछे हटने का इरादा नहीं है। उन्होंने कहा, चीन अपनी संप्रभुता की रक्षा करेगा। इस दौरान अमेरिकी एनएसए जेक सुलिवन और उनके चीनी समकक्ष के बीच भी तीखी नोंकझोंक हुई।