अमेरिकी चैंबर ऑफ कॉमर्स ने एच-1बी वीजा को लेकर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के नए नियमों पर चिंता जताई है। व्यापार संगठन ने कहा कि कर्मचारियों, उनके परिवारों और कंपनियों पर इस कदम का असर पड़ेगा। उसने बताया कि वह ट्रंप प्रशासन और अपने सदस्यों के साथ मिलकर इस फैसले के सभी पहलुओं को समझने की कोशिश कर रहा है और आगे का रास्ता तय करने पर विचार कर रहा है।
दरअसल, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत एच-1बी वीजा आवेदन करने के लिए कंपनियों को एक लाख अमेरिकी डॉलर का शुल्क (फीस) देना होगा। यह नियम एच-1बी के लिए नए आवेदन पर लागू होगा। यानी पहले से दायर आवेदन नहीं लागू होगा।
अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) ने स्पष्ट किया कि यह नया शुल्क केवल उन आवेदनों पर लागू होगा, जो 21 सितंबर के बाद किए जाएंगे। जिन लोगों के आवेदन पहले ही आ चुके हैं या जिनके वीजा पहले से मंजूर हैं, उन पर कोई असर नहीं होगा। यूएससीआईएस के निदेशक जोसेफ बी. एडलो ने एक ज्ञापन में यह जानकारी दी।
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व्हाइट हाउस ने की एच-1बी वीजा आवेदन पर नया शुल्क लगाने की पुष्टि
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने इसकी पुष्टि की और बताया कि यह शुल्क एक बार के लिए है, कोई वार्षिक शुल्क नहीं है। उन्होंने कहा कि यह नियम केवल नए वीजा आवेदनों पर लागू होगा, न की नवीकरण या पहले से जारी वीजा पर। उन्होंने यह भी बताया कि जो एच-1बी वीजा धारक अभी अमेरिका से बाहर हैं, उनसे यह शुल्क नहीं लिया जाएगा। ऐसे लोग पहले की तरह अमेरिका में आ-जा सकते हैं, उनके आने-जाने पर कोई नई रोक नहीं लगाई गई है। यह नियम अगले वीजा लॉटरी चक्र से लागू किया जाएगा।
भारतीय आईटी पेशेवर होंगे सबसे अधिक प्रभावित
इन नए नियम ने भारत के लिए चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि 71-72 फीसदी एच-1बी वीजा भारतीयों को ही दिए जाते हैं। इस वजह से भारतीय तकनीकी पेशेवरों और अमेरिका से भारत आने वाले पैसे (रेमिटेंस) पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
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भारत सरकार ने सभी दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों को दिया निर्देश
भारत सरकार ने अपने सभी दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों को निर्देश दिया है कि अगले चौबीस घंटों में अमेरिका वापस जाने वाले भारतीय नागरिकों को हरसंभव मदद दी जाए। शनिवार को भारत सरकार ने कहा कि अमेरिका के इस फैसले से सभी तरह के प्रभावों का अध्ययन किया जा रहा है और यह फैसला मानवीय दृष्टिकोण से से कई परिवारों के लिए मुश्किलें ला सकता है।
विदेश मंत्रालय ने ट्रंप प्रशासन के फैसले पर क्या कहा?
विदेश मंत्रालय (एमईए) ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका और भारत दोनों के उद्योग जगत का नवाचार (इनोवेशन) और रचनात्मका (क्रिएटिविटी) में अहम योगदान है और ऐसे में दोनों देशों के हित में है कि मिलकर आगे राह निकाली जाए। मंत्रालय ने यह भी बताया कि भारतीय उद्योग जगत इस फैसले के असर का शुरुआती मूल्यांकन कर चुका है और इसे जुड़े भ्रम को दूर करने की कोशिश की जा रही है।