चैंबर ऑफ कॉमर्स ने इस मुद्दे को अमेरिकी प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए एक सीधा खतरा बताया और चेतावनी दी कि कुशल विदेशी श्रम की कमी नवाचार को नुकसान पहुंचाएगी, खासकर प्रौद्योगिकी और विज्ञान क्षेत्रों में जहां योग्य अमेरिकी कर्मचारियों की कमी बनी हुई है।
अमेरिकी सरकार ने बीते दिनों एच-1बी वीजा की फीस में भारी बढ़ोतरी कर इसे एक लाख डॉलर कर दिया था। अब अमेरिका में ही इसका विरोध शुरू हो गया है। अमेरिका के चैंबर ऑफ कॉमर्स ने ट्रंप सरकार के इस फैसले को अदालत में चुनौती देते हुए याचिका दायर की है। यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स ने गुरुवार को यह जानकारी दी।
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एच-1बी वीजा की आवेदन फीस बढ़ाना गैरकानूनी
अपनी याचिका में यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स ने कहा है कि एच-1बी वीजा की नई फीस गैरकानूनी है क्योंकि यह अप्रवासन और राष्ट्रीयता कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करती है। अमेरिका में अप्रवासन और राष्ट्रीयता कानून क तहत ही एच-1बी वीजा कार्यक्रम संचालित किया जाता है। यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स के कार्यकारी उपाध्यक्ष और मुख्य नीति अधिकारी नील ब्रैडली ने एक बयान जारी कर कहा कि 'एक लाख डॉलर का नया वीजा शुल्क अमेरिकी नियोक्ताओं, खासकर स्टार्ट-अप्स और छोटे तथा मध्यम आकार के व्यवसायों के लिए एच-1बी कार्यक्रम का इस्तेमाल महंगा कर देगा, जिसे कांग्रेस ने सभी आकार के अमेरिकी व्यवसायों की वैश्विक प्रतिभा तक पहुंच बनाने के लिए बनाया था। इससे कंपनियों को अमेरिका में अपने परिचालन को बढ़ाने में मदद मिलती है।'
चैंबर ऑफ कॉमर्स ने इस मुद्दे को अमेरिकी प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए एक सीधा खतरा बताया और चेतावनी दी कि कुशल विदेशी श्रम की कमी नवाचार को नुकसान पहुंचाएगी, खासकर प्रौद्योगिकी और विज्ञान क्षेत्रों में जहां योग्य अमेरिकी कर्मचारियों की कमी बनी हुई है।
ट्रंप प्रशासन ने फीस बढ़ाकर एक लाख डॉलर की
बीते दिनों ट्रंप ने H1-B वीजा की सालाना फीस को लेकर एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए। इस नए आदेश के मुताबिक, एच-1बी वीजा की फीस को एक लाख डॉलर (करीब 88 लाख रुपये) कर दिया गया है। ट्रंप के इस फैसले को अमेरिका में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों पर बड़ा असर पड़ सकता है। बता दें कि एच-1बी वीजा पर बड़ी संख्या में भारतीय, अमेरिका में कार्यरत हैं। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि एक लाख डॉलर का शुल्क नई याचिकाओं के लिए नियोक्ता से लिया जाने वाला एकमुश्त भुगतान है, न कि वार्षिक शुल्क।