अमेरिकी सेना ने यूरोप में ड्रोन युद्ध की तकनीक पर काम कर रही अपनी एक विशेष यूनिट को बंद करने का फैसला किया है। यह यूनिट पिछले करीब एक साल से ड्रोन बनाने, उनका इस्तेमाल करने और युद्ध के दौरान ड्रोन से लड़ने की रणनीति पर प्रयोग कर रही थी। अब इसे दोबारा एक पारंपरिक एयरबोर्न इन्फैंट्री बटालियन के रूप में काम करने का निर्देश दिया गया है। यह यूनिट इटली और जर्मनी में तैनात 173वीं एयरबोर्न ब्रिगेड का हिस्सा है। पिछले साल नवंबर में करीब 600 सैनिकों की एक बटालियन को विशेष रूप से ड्रोन युद्ध के लिए तैयार किया गया था। इसका उद्देश्य ऐसी तकनीक और रणनीति विकसित करना था, जिसे जरूरत पड़ने पर किसी भी युद्ध क्षेत्र में इस्तेमाल किया जा सके।
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यूक्रेन युद्ध से मिली सीख पर बना था फोकस
अमेरिकी सेना ने यूक्रेन और रूस के बीच लंबे समय से चल रहे युद्ध में ड्रोन के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से सीख लेने के लिए यह प्रयोग शुरू किया था। यूक्रेन ने युद्ध में कम लागत वाले ड्रोन, खासकर FPV ड्रोन, का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया है। 173वीं एयरबोर्न ब्रिगेड के सैनिक इटली में एक विशेष FPV ड्रोन लैब में अपने हमलावर ड्रोन भी तैयार कर रहे थे। सेना के मुताबिक, सैनिक ड्रोन के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऐसे ड्रोन विकसित करने पर भी काम कर रहे थे, जिन्हें दुश्मन की जैमिंग तकनीक से बचाया जा सके।
दो बड़े अभ्यासों के बाद खत्म होगा प्रयोग
अमेरिकी सेना के अधिकारियों के मुताबिक, विशेष ड्रोन यूनिट इस महीने और अगले महीने जर्मनी में होने वाले दो बड़े सैन्य अभ्यासों के बाद अपना प्रयोगात्मक काम पूरा करेगी। इसके बाद यूनिट की ओर से पिछले एक साल में हासिल की गई जानकारी और अनुभव सेना को सौंपा जाएगा। सेना का कहना है कि इन अनुभवों का इस्तेमाल भविष्य में सैनिकों की तैनाती, सैन्य ढांचे और ड्रोन से जुड़ी नई तकनीक के विकास की योजना बनाने में किया जाएगा।
ईरान युद्ध में ड्रोन की उपयोगिता के बावजूद फैसला
इस फैसले की खास बात यह है कि अमेरिकी सेना के लिए ड्रोन युद्ध का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ईरान के साथ युद्ध के दौरान ईरान ने कम लागत वाले शाहेद ड्रोन का इस्तेमाल अमेरिकी जहाजों और सैन्य ठिकानों के खिलाफ किया। इन हमलों में अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने, एक सेना के हेलिकॉप्टर के गिरने और महंगे इंटरसेप्टर मिसाइलों के इस्तेमाल की बात सामने आई है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने मार्च में कहा था कि यूक्रेन कई मध्य पूर्वी और खाड़ी देशों को ईरानी ड्रोन हमलों से निपटने में मदद कर रहा है। अमेरिका और यूरोपीय देशों ने भी ड्रोन युद्ध से जुड़ी यूक्रेन की विशेषज्ञता में रुचि दिखाई है।
पहले सेना की प्राथमिकता में थे ड्रोन
अमेरिकी सेना के पूर्व प्रमुख जनरल रैंडी जॉर्ज के कार्यकाल में ड्रोन को सैन्य रणनीति में शामिल करने पर काफी जोर दिया गया था। जॉर्ज और सेना सचिव डैन ड्रिस्कॉल ने ‘आर्मी ट्रांसफॉर्मेशन इनिशिएटिव’ के तहत सैन्य इकाइयों में आधुनिक मानवरहित विमान प्रणालियों को शामिल करने की योजना बनाई थी। जॉर्ज को अप्रैल में रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने अचानक पद से हटा दिया था। इसके बाद जनरल क्रिस्टोफर लानेव ने सेना के कार्यवाहक प्रमुख का पद संभाला। अब लानेव के नेतृत्व में सेना अपनी प्राथमिकताओं में बदलाव कर रही है।
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सेना प्रमुख ने कहा- अगला युद्ध अलग होगा
लानेव ने हाल ही में जारी एक मार्गदर्शक दस्तावेज में कहा कि अगला युद्ध पिछले युद्धों जैसा नहीं होगा। उन्होंने सैनिकों से नई तकनीक के साथ तेजी से सीखने, प्रयोग करने और अपनी रणनीति बदलने की जरूरत बताई है। हालांकि, उनके दस्तावेज में ड्रोन का सीधे तौर पर जिक्र नहीं किया गया है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोनॉमस तकनीक जैसी आधुनिक प्रणालियों के साथ सैनिकों की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया है। अमेरिकी सेना का कहना है कि ड्रोन यूनिट का प्रयोग खत्म होने के बावजूद इससे मिले अनुभव भविष्य की सैन्य रणनीति और ड्रोन तकनीक को विकसित करने में इस्तेमाल किए जाएंगे।