उत्तर कोरिया के जापान के ऊपर से बैलिस्टिक मिसाइलें दागने के जवाब में अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने भी कोरियाई प्रायद्वीप के पूर्वी तट की दिशा में चार मिसाइलें दागी हैं। खुद दक्षिण कोरिया के सेना प्रमुख ने इस बात का एलान किया। बुधवार को दक्षिण कोरिया ने जो मिसाइलें दागीं, उनमें एटीएसीएमएस प्रक्षेपास्त्र शामिल हैं।
उत्तर कोरिया ने मंगलवार को मिसाइलें दागी थीं। उसके बाद अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने अलग-अलग जवाबी कार्रवाई की। इन घटनाओं से दक्षिण-पूर्व एशिया में अचानक तनाव काफी बढ़ गया है। अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के रणनीतिक संचार समन्वयक जॉन किर्बी के मुताबिक जवाबी मिसाइलें यह दिखाने के लिए दागी गईं कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के पास उत्तर कोरिया की किसी भड़काऊ कार्रवाई का सैनिक रूप से जवाब देने की क्षमता है।
मंगलवार को उत्तर कोरिया ने बिना कोई चेतावनी दिए जापान के ऊपर से बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं। ऐसा उसने पांच साल में पहली बार किया। अमेरिका ने इसे उत्तर कोरिया की बेहद भड़काऊ और गैर-जिम्मेदार कार्रवाई माना है।
खबरों में कहा गया है कि उत्तर कोरिया की बैलिस्टिक मिसाइलें जापान के ऊपर से गुजरते हुए प्रशांत महासागर में जाकर गिरीं। इसके पहले 2017 में भी उत्तर करिया ने जापान के ऊपर से मिसाइल दागी थी। इस वर्ष उत्तर कोरिया 23 बार मिसाइलें दाग चुका है। इनमें से ज्यादातर मौकों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गई हैं। उत्तर कोरिया के वर्तमान सर्वोच्च नेता किम जोंग उन 2012 में सत्ता में आए थे। उसके बाद किसी एक वर्ष में इतनी बार उत्तर कोरिया ने मिसाइलें नहीं दागीं। 2020 में ऐसी सिर्फ चार 2021 में आठ घटनाएं हुई थीं।
मंगलवार को दिखे नजारे से यह संकेत मिला कि उत्तर कोरिया काफी शक्तिशाली और दूर तक मार करने वाली मिसाइलें बना चुका है। उसकी मिसाइलें एक हजार किलोमीटर की ऊंचाई से गुजरते हुए 4,600 किलोमीटर तक गईं। इस वर्ष दागी गईं उसकी मिसाइलों में सबसे तीव्र गति से गुजरने वाली मिसाइल 17 मार्च को छोड़ी गई थी। वह मिसाइल ध्वनि की रफ्तार से 17 गुना अधिक तेजी से गुजरी थी।
अमेरिकी विशेषज्ञों ने ध्यान दिलाया है कि अमेरिकी द्वीप गुआम उत्तर कोरिया से 3,380 किलोमीटर दूर है। यानी ये इलाका उत्तर कोरिया के मिसाइल रेंज के अंदर आता है। एक विशेषज्ञ ने अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन से कहा- ‘उत्तर कोरिया के पास बहुत-सी मिसाइलें ऐसी हैं, जो छोटी दूरी तक मार करने में ही सक्षम हैं। वे जापान तक नहीं पहुंच सकतीं। लेकिन उसके पास कुछ मिसाइलें ऐसी हैं, जो ये दूरी तय कर सकती हैं।’
आम तौर पर उत्तर कोरिया अपनी मिसाइलें कोरियाई प्रायद्वीप के तट से समुद्र की तरफ दागता रहा है। इसीलिए इस बार जापान के ऊपर से इन्हें दागने के उसके फैसले को अहम माना जा रहा है। विश्लेषकों ने कहा है कि इसके जरिए उत्तर कोरिया ने कुछ खास संदेश देने की कोशिश की है। उसने दिखाया है कि उसके पास ऐसी मिसाइलें हैं, जो विमान से लेकर जहाजों तक को निशाना बना सकती हैँ।
जापान के थिंक टैंक इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज में सीनियर फेलॉ रॉबर्ट वार्ड ने कहा है- इस समय जापान को उत्तर मे रूस से लेकर दक्षिण में चीन तक से सुरक्षा संबंधी खतरों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में हो सकता है कि उत्तर कोरिया ने अस्थिर अंतरराष्ट्रीय स्थिति का फायदा उठाते हुए अपनी ताकत दिखाने की कोशिश की हो।