US: चीन की ओर से दुर्लभ खनिजों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद अमेरिका ने कहा कि वह भारत, यूरोप और अन्य सहयोगी देशों के साथ मिलकर सामूहिक प्रतिक्रिया देने की तैयारी करेगा। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह केवल चीन बनाम एक देश नहीं, बल्कि चीन बनाम पूरी दुनिया की स्थिति है और सहयोगियों से समर्थन की उम्मीद है।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बुधवार को कहा कि अमेरिका भारत सहित अन्य सहयोगी देशों के साथ मिलकर चीन की ओर से दुर्लभ खनिजों पर लगाए गए निर्यात प्रतिबंधों के खिलाफ 'सामूहिक प्रतिक्रिया' की तैयारी करेगा। चीन इन खनिजों पर दबदबा रखता है। उसने यह आरोप लगाते हुए हाल ही में इनके खनन और प्रसंस्करण पर और अधिक नियंत्रण उपायों की घोषणा की कि कुछ विदेशी कंपनियां उसके खनिजों का उपयोग सैन्य उद्देश्य के लिए कर रही हैं।
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चीन के इस कदम से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नाराज हैं, जिन्होंने चीन से आने वाली वस्तुओं पर 100 फीसदी तक के शुल्क की धमकी दी है। बेंसेंट ने बुधवार को सीएनबीसी से कहा, हम यूरोपीय सहयोगियों, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, भारत और एशियाई लोकतंत्रों से बात करने जा रहे हैं। अगर हम इस परएक सामूहिक प्रतिक्रिया देंगे, क्योंकि चीन के नौकरशाह बाकी दुनिया के लिए आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) या विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) प्रक्रियाको नियंत्रित नहीं कर सकते।
दुनिया में दुर्लभ खनिजों (रेअर अर्थ मिनरल) के खनन का लगभग 70 फीसदी चीन के पास है, लेकिन प्रसंस्करण गतिविधियों में वह 90 फीसदी से अधिक नियंत्रित करता है, जिससे वह आधुनिक उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली इन धातुओं का लगभग एकमात्र आपूर्तिकर्ता बन जाता है। अमेरिका, यूरोपीय संघ और भारत तीनों चीन के इन खनिजों के शीर्ष आयातक हैं।
फॉक्स बिजनेस के साथ एक साक्षात्कार में बेसेंट ने कहा कि वॉशिंगटन भारत और अन्य सहयोगी राष्ट्रों से समर्थन की उम्मीद करता है। उन्होंने कहा, यह चीन बनाम दुनिया है। चीन ने पूरी मुक्त दुनिया की आपूर्ति श्रृंखला और औद्योगिक ढांचे पर हमला करने जैसा संकेत दिया है। बेसेंट ने आगे कहा, हम पहले ही सहयोगियों से संपर्क कर चुके हैं। इस हफ्ते हम उनसे मिलेंगे और मुझे उम्मीद है कि हमें यूरोप, भारत और एशिया के लोकतंत्रों से व्यापक वैश्विक समर्थन मिलेगा।