नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा बड़ी विकट स्थिति में फंस गए दिखते हैं। एक तरफ उनके नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन अमेरिकी संस्था मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन (एमसीसी) से आर्थिक सहायता स्वीकार करने के प्रस्ताव को मंजूरी देने को तैयार नहीं दिख रहा है, वहीं वे खुद को इस स्थिति में नहीं पा रहे हैं कि इस मुद्दे पर अमेरिका को नाराज करें।
इसके पहले सत्ताधारी गठबंधन के घटक दल नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (माओइस्ट सेंटर) के दबाव में बुधवार को देउबा को इस मामले में अपना रुख बदलना पड़ा था। मंगलवार को उन्होंने साफ कह दिया था कि उन्होंने एमसीसी से 2017 में हुए करार के संसदीय अनुमोदन की प्रक्रिया शुरू करने के लिए प्रतिनिधि सभा (संसद के निचले सदन) के स्पीकर से बात की है। लेकिन अगले दिन उन्होंने अपने कदम पीछे खींच लिए।
माओइस्ट सेंटर के अध्यक्ष पुष्प कमल दहल ये चेतावनी दे चुके हैं कि अगर सरकार ने एमसीसी करार का संसदीय अनुमोदन कराया, तो उनकी पार्टी सत्ताधारी गठबंधन से निकल जाएगी। देउबा की नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाले इस गठबंधन में कुल पांच दल शामिल हैं। उनमें से नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (यूनिफाइड सोशलिस्ट) और राष्ट्रीय जन मोर्चा भी एमसीसी की सहायता लेने के खिलाफ है। यानी पांच में तीन दल अमेरिकी मदद स्वीकार करने के खिलाफ हैं। अब सामने आया है कि जनता समाजवादी पार्टी में भी इस मुद्दे पर गहरे मतभेद हैं।
अखबार काठमांडू पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल स्थित अमेरिकी राजदूत रैंडी बेरी बुधवार को देउबा से मिले थे। बताया जाता है कि उन्होंने एमसीसी करार के संसदीय अनुमोदन की दिशा में हुई प्रगति बारे में उनसे जानकारी ली। देउबा ने गुरुवार को कहा कि नेपाली कांग्रेस संसदीय अनुमोदन के प्रस्ताव को सदन में रखने के लिए वचनबद्ध हैं। उन्होंने कहा- ‘हो सकता है कि प्रस्ताव पारित ना हो पाए, लेकिन उसे सदन में रखना होगा।’ देउबा ने यह भी कहा कि एमसीसी की मदद नेपाल के हित में है, इसीलिए वे उसका अनुमोदन कराने के लिए पूरा जोर लगाए हुए हैं।