वेनेजुएला में अमेरिका की कार्रवाई और फिर वहां के अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को बंधक बनाने के बाद वैश्विक राजनीति में बड़े पैमाने पर तहलका मचा हुआ है। सवाल, समर्थन और विरोध का सिलसिला भी अपने चरम पर है। जद्दोजहद इस बात की बनी हुई है कि अब मादुरो का क्या होगा? बहराल इन सभी चिजों को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सोमवार को एक आपात बैठक बुलाई, जिसमें संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनिया गुटेरेस समेत अमेरिका के सहयोगी देश और विरोध देश सभी ने अमेरिका के इस कार्रवाई का जमकर विरोध किया। हालांकि इस बैठक में अमेरिका अपने रुख पर अभी भी कायम रहा।
रूस, डेनमार्क कोलंबिया सभी ने जताई चिंता
बैठक में रूस ने अमेरिका के इस कार्रवाई की आलोचना की। रूस ने कहा कि अमेरिका खुद को 'सुप्रीम जज' नहीं बना सकता, जो किसी भी देश में अवैध रूप से हमला करके कानून लागू करे। रूस का कहना था कि ये कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता के खिलाफ है।
बैठक में डेनमार्क ने भी इस कार्रवाई को लेकर चिंता जताई। साथ ही कहा कि ग्रीनलैंड की सीमाओं और अधिकारों का उल्लंघन स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी देश को अन्य देशों की सीमाओं में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। वहीं कोलंबिया के राजदूत ने कहा कि अमेरिका का यह अभियान हमारे क्षेत्र में सबसे बुरी तरह का हस्तक्षेप है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को हिंसा या धमकी से लागू नहीं किया जा सकता और आर्थिक हित लोकतांत्रिक प्रक्रिया से ऊपर नहीं हो सकते।
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अमेरिका का कहना है कि इस ऑपरेशन का उद्देश्य वेंज़ुएला के तेल संसाधनों पर अस्थायी नियंत्रण रखना और उन पर नीति दबाव डालना भी है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका पहले से लागू तेल संगरोध का पालन करेगा और इसे वेंज़ुएला की नीति बदलने के लिए दबाव के तौर पर इस्तेमाल करेगा।