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अमेरिकी चुनाव में इस बार कितनी रही ‘रोबोकॉल’ की भूमिका?

Wed, 04 Nov 2020 05:13 PM IST
मुकेश कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

  • रोबोकॉल को लेकर जानकारों ने जताई आशंका, एफबीआई ने शुरु की जांच
  • कोरोना काल में वोट न डालने और घर से न निकलने की अपील वाले आए ‘रोबोकॉल’
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डोनाल्ड ट्रंप-जो बाइडेन (फाइल फोटो) - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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अमेरिका की खुफिया एजेंसी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टीगेशन (एफबीआई) ने इस शिकायत की जांच शुरू कर दी है कि क्या चुनाव से कुछ दिन पहले से मतदाताओं को अज्ञात स्रोतों से जानबूझ कर रोबोकॉल किए गए। इनमें मतदाताओं से कहा गया कि मतदान के दिन सुरक्षित रहने के लिए जरूरी है कि वो अपने घर पर ही रहें। 

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राजनीतिक विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि शायद ऐसा नियोजित ढंग से किया गया हो, ताकि कड़े मुकाबले वाले इस चुनाव में एक खास रूझान वाले मतदाताओं को वोट डालने से रोका जा सके। एफबीआई ने ये जांच संभाल ली है, मंगलवार रात इसकी पुष्टि अमेरिका के होमलैंड सिक्युरिटी मंत्रालय ने की।


रोबोकॉल कंप्यूटर से किए जाने वाले उन फोन कॉल्स को कहा जाता है, जिनके जरिए पहले से रिकॉर्ड किए गए संदेश को लोगों को सुनाए जाते हैं। राजनीतिक और कारोबारी संदेश देने के लिए या फिर किसी आपातकाल में लोगों को जागरूक करने के लिए ऐसे कॉल का इस्तेमाल किया जाता है।
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अमेरिका के सरकारी अधिकारियों के मुताबिक उन्हें दो स्रोतों से किए गए ऑटोमेटेड कॉल्स की शिकायत मिली है। उनमें ऐसी आवाज का इस्तेमाल किया गया, जैसा आम तौर पर अमेरिका में नगर निकायों की तरफ से लोगों को सूचित या आगाह करने के लिए किए जाने वाले संदेशों में होता है।

एंटी-रोबोकॉल सॉफ्टवेयर की निर्माता कंपनी यू-मेल के मुताबिक अमेरिका 90 फीसदी एरिया कोड्स में मतदान से संबंधित रोबोकॉल रिसीव किए गए। यू-मेल के निष्कर्ष मंगलवार को वॉशिंगटन पोस्ट अखबार में छपे। इनके मुताबिक हालांकि कई हफ्तों से लोग ऐसे कॉल रिसीव कर रहे थे, लेकिन हाल के दिनों में उनकी संख्या बहुत बढ़ गई। अक्तूबर महीने में ऐसे एक करोड़ कॉल किए गए। कई राज्यों से मतदान शुरू होने से ठीक पहले बड़ी संख्या में वोटरों के पास ऐसे कॉल आने की खबर है। इनमें कहा गया कि ये समय है, जब सुरक्षित रहने के लिए आपको अपने घर पर ही रहना चाहिए। 

यू-मेल के मुताबिक रोबोकॉल में बहुत बारीक तरीके अपनाए जाते हैं। उन्हें इस तरह किया जाता है कि बोलने वाले की पहचान और जहां से उसने कॉल किया है, उस स्थान की पहचान छिपी रहती है। होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के अधिकारियों ने अल जजीरा न्यूज चैनल को बताया कि ऐसे कॉल हर चुनाव के समय आते हैं, लेकिन गई जानकारों के मुताबिक इस बार ये अधिक योजनाबद्ध ढंग से किए गए मालूम पड़ते हैं।

अमेरिका के मिशिगन राज्य के अटार्नी जनरल डाना नेसेल ने अपने ट्विट में कहा कि साफ तौर पर ये झूठे कॉल मतदाताओं को मतदान से रोकने की कोशिश थी। अमेरिका में मतदाताओं को मतदान से रोकने या इसके लिए हतोत्साहित करने की प्रवृत्ति एक जानी-पहचानी समस्या है। इसे वोटर सप्रेशन कहा जाता है। खासकर कमजोर वर्ग के और अश्वेत वोटरों को वोट डालने से रोकने के लिए कई तरह के अड़ेंगे डाले जाते हैं।

इनमें मुश्किल से मिलने वाले पहचान पत्रों को अनिवार्य बनाना, बूथों आबादी से दूर बनाना, कुछ तरह के जुर्माने लगाकर वोट डालने से रोकना आदि शामिल हैं। इस बार कोरोना महामारी के बीच हुए चुनाव में क्या रोबोकॉल का इस्तेमाल भी इस मकसद से किया गया, ये सवाल यहां चर्चा में है। इस बारे में सच्चाई एफबीआई की जांच रिपोर्ट से पता चल पाएगी। 
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