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US: अमेरिका में वोटर डाटा पर बवाल जारी, 19 राज्यों से जानकारी मांग रहा न्याय विभाग; गोपनीयता पर उठे सवाल

Sun, 03 Aug 2025 07:42 PM IST
हिमांशु चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

अमेरिकी न्याय विभाग ने हाल ही में 19 राज्यों से वोटर रजिस्ट्रेशन डाटा और चुनाव से जुड़ी जानकारी मांगी है, जिससे गोपनीयता और संवैधानिक अधिकारों पर बहस छिड़ गई है। कई राज्यों ने इस अनुरोध को खारिज किया है, जबकि कुछ ने सीमित जानकारी दी है।
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डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : एक्स/व्हाइट हाउस
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विस्तार
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अमेरिकी न्याय विभाग ने हाल के महीनों में देश के कम से कम 19 राज्यों से वोटर डेटा और चुनाव संबंधी जानकारी मांगी है। इस कदम को लेकर अब कई राज्यों के चुनाव अधिकारियों ने चिंता जताई है कि क्या यह संविधान प्रदत्त उनके अधिकारों में हस्तक्षेप है और मतदाता गोपनीयता को खतरा है।

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एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, बीते तीन महीनों में न्याय विभाग के वोटिंग सेक्शन ने 15 से अधिक राज्यों से वोटर रजिस्ट्रेशन की सूचियां और चुनाव प्रक्रियाओं से जुड़ी जानकारियां मांगी हैं। इनमें डेमोक्रेटिक पार्टी के नौ, रिपब्लिकन पार्टी के पांच और एक द्विदलीय आयोग शामिल हैं। उदाहरण के तौर पर, कोलोराडो से 2020 और 2024 के चुनावों से जुड़ी सभी रिकॉर्ड्स की मांग की गई है।

फेडरल सरकार की भूमिका को लेकर उठे सवाल
संविधान के अनुसार, अमेरिका में चुनावों का संचालन राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आता है। ऐसे में कुछ राज्य अधिकारियों ने यह सवाल उठाया है कि क्या केंद्र सरकार मतदाता डेटा मांगकर राज्यों की स्वायत्तता में हस्तक्षेप कर रही है। कई अधिकारियों ने यह भी कहा कि यदि यह डेटा गलत हाथों में चला गया तो नागरिकों की गोपनीयता को खतरा हो सकता है।
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कुछ राज्यों ने दी सीमित जानकारी
अलास्का, कैलिफोर्निया, फ्लोरिडा, मिशिगन, न्यूयॉर्क, विस्कॉन्सिन जैसे राज्यों ने पुष्टि की कि उन्हें वोटर रजिस्ट्रेशन डेटा से जुड़ी चिट्ठियां मिली हैं। कुछ राज्यों ने जन सूचना के तहत सीमित डेटा मुहैया कराया है, जिसमें संवेदनशील जानकारी जैसे सोशल सिक्योरिटी नंबर हटा दिए गए। वहीं कुछ राज्यों जैसे मिनेसोटा और मेन ने इन मांगों को अस्वीकार कर दिया है।

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गैर-नागरिक वोटिंग पर फोकस
न्याय विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उनका मकसद चुनावी धोखाधड़ी और गैर-नागरिकों द्वारा मतदान जैसी समस्याओं की पहचान करना है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि ये दोनों ही घटनाएं अमेरिका में बेहद दुर्लभ हैं और अक्सर डोनाल्ड ट्रंप और उनके समर्थकों द्वारा चुनावों की वैधता पर सवाल उठाने के लिए इनका सहारा लिया जाता है।

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कुछ अनुरोध कानूनी रूप से संदेहास्पद
चुनावी कानून विशेषज्ञों का कहना है कि न्याय विभाग को अगर किसी भी राज्य से व्यक्तिगत डेटा चाहिए, तो उसे पहले फेडरल रजिस्टर में नोटिस जारी करना होता है और संबंधित संसदीय समितियों को सूचित करना होता है। इसके अलावा, 1974 के प्राइवेसी एक्ट के तहत भी ऐसी जानकारियों के संग्रहण पर सख्त नियम लागू होते हैं।

राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश का हवाला
न्याय विभाग की ओर से भेजे गए कुछ ईमेल्स में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मार्च में दिए गए कार्यकारी आदेश का हवाला दिया गया है, जिसमें राज्य चुनाव अधिकारियों के साथ सूचना साझेदारी की बात कही गई है। इसके तहत, कुछ राज्यों को प्रस्ताव दिया गया है कि वे वोटिंग फ्रॉड से जुड़ी घटनाओं पर डेटा साझा करें, ताकि न्याय विभाग जांच कर सके।

 

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