यूएन में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति
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भारत ने सशस्त्र संघर्षों में महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा में शामिल लोगों और संस्थाओं को काली सूची में डालने के लिए संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध संबंधित प्रशासन मजबूत बनाने की अपील की है। भारत का कहना है कि यौन हिंसा का इस्तेमाल लोगों के उत्पीड़न के लिए किया जाता है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने संघर्षों में यौन हिंसा विषय पर सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की खुली चर्चा में कहा कि यौन हिंसा को अपराध बनाकर उसके प्रभावी अभियोजन को सुनिश्चित करने के लिए यह जरूरी है कि सदस्य देश विश्व मानकों के अनुरूप व्यापक कानूनी ढांचा विकसित करें।
उन्होंने कहा, राज्य या राज्येतर तत्वों द्वारा सश्स्त्र संघर्षों में यौन हिंसा का इस्तेमाल लोगों के दमन के लिए किया जाता है। यह समुदायों के विस्थापन, अस्थिरीकरण और उत्पीड़न को बढ़ावा देता है और शासन को कमजोर करने के साथ ही संघर्षों के बाद पुनर्वास और स्थिरता के अवसरों को जोखिम में डालता है।
उन्होंने कहा, राष्ट्रीय सरकारों की प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वे अपने देशों में संघर्ष की स्थितियों में हुए ऐसे अपराधों को न होने दें। इस मुद्दे पर यूएन को सदस्य देशों की क्षमता बढ़ाने में मदद करनी चाहिए।