29 अप्रैल को काबुल की एक मस्जिद में बम धमाका किया गया, जिसमें 30 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई वहीं कई घायल हो गए। इससे पहले भी यहां कई ऐसे हमले किए गए, जिसमें आम नागरिकों को निशाना बनाया गया है।
तालिबान राज के बाद से अफगानिस्तान आतंक का दंश झेल रहा है। आतंकी हमले यहां आम बात हो गई है। इस बीच पाकिस्तान से तकरार के चलते भी इस देश में आतंकी गतिविधियां बढ़ गई हैं। 29 अप्रैल को काबुल की एक मस्जिद में बम धमाका किया गया, जिसमें 30 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई वहीं कई घायल हो गए।
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अफगानिस्तान में इस तरह का हमला पहला नहीं है। इससे पहले भी यहां कई ऐसे हमले किए गए, जिसमें आम नागरिकों को निशाना बनाया गया है।
यूएनएससी ने की निंदा
अफगानिस्तान में बढ़ते आतंकी हमलों के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने बयान जारी किया है। सुरक्षा परिषद की ओर से जारी किए गए बयान में इन हमलों की निंदा की गई है। इसके साथ ही आतंक का समर्थन, उनको आर्थिक मदद मुहैया कराने वालों को जवाबदेह ठहराने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। मस्जिद हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए यूएनएससी ने कहा, आतंक का समर्थन करने वालों को न्याय के कटघरे में लाना होगा। इस दौरान सुरक्षा परिषद ने सभी देशों से आतंकवाद के खिलाफ सहयोग की अपील की। यूएनएनसी ने कहा आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व शांति के लिए खतरा है।
28 अप्रैल को भी हुए थे धमाके
अफगानिस्तान में 28 अप्रैल की शाम भी दो धमाके हुए थे। दो विस्फोटों में कम से कम नौ लोग मारे गए और 13 अन्य घायल हो गए। धमाका बल्ख प्रांत के मजार-ए-शरीफ इलाके में हुआ था। इन धमाकों में सार्वजनिक परिवहन को निशाना बनाया गया। इससे पहले भी 21 अप्रैल को अफगानिस्तान में आतंकी हमले हुए थे। इन हमलों की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली थी।