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UNSC: दिल्ली घोषणापत्र प्रतिबद्धताओं को लेकर सुरक्षा परिषद समिति सहमत; वित्तीय प्रौद्योगिकियों पर कसेगी नकेल

Sat, 25 Jan 2025 09:07 AM IST
ज्योति भास्कर वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला

सार

दिल्ली घोषणापत्र से जुड़ी प्रतिबद्धताओं को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की समिति ने सहमति जताई है। सूत्रों के मुताबिक, समिति अबू धाबी मार्गदर्शक सिद्धांतों के आधार पर आगे बढ़ेगी।
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (फाइल फोटो) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की एक समिति ने दिल्ली घोषणापत्र से जुड़ी प्रतिबद्धताओं को लेकर सहमति जताई है। आतंकी गतिविधियों के लिए नई-उभरती वित्तीय प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल रोकने पर भी सहमति बनी है। सूत्रों के मुताबिक, समिति अबू धाबी मार्गदर्शक सिद्धांतों के आधार पर आगे बढ़ेगी। समिति आने वाले दिनों में परिषद के अध्यक्ष के तौर पर भारत के कार्यकाल में तय की गई प्रतिबद्धताओं पर काम करेगी।
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दिल्ली घोषणापत्र प्रतिबद्धताओं को लेकर सुरक्षा परिषद समिति सहमत
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की आतंकवाद रोधी समिति (सीटीसी) ने आतंकी गतिविधियों के लिए नई व उभरती वित्तीय प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल रोकने के लिए मार्गदर्शक सिद्धांतों पर सहमति जताई है। इसका मकसद परिषद के अध्यक्ष के तौर पर भारत के कार्यकाल के दौरान आतंकवाद से लड़ने के लिए संयुक्त राष्ट्र निकाय द्वारा की गईं प्रतिबद्धताओं पर आगे बढ़ना है। इस माह की शुरुआत में अल्जीरिया की अध्यक्षता में आतंकवाद-रोधी समिति (सीटीसी) ने ‘अल्जीरिया मार्गदर्शक सिद्धांतों’ पर सहमति व्यक्त की थी।

आतंकी गतिविधियों के लिए नई-उभरती वित्तीय प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल रोकेंगे
सूत्रों के मुताबिक, समिति ने अबू धाबी मार्गदर्शक सिद्धांतों के आधार पर यह सहमति व्यक्त की है। अबू धाबी मार्गदर्शक सिद्धांत यूएनएससी सीटीसी द्वारा अपनाए गए दिशा-निर्देश हैं। इन सिद्धांतों में आतंकी गतिविधियों के लिए मानव रहित विमान प्रणालियों (यूएएस) के उपयोग से निपटने की जानकारी दी गई है, जिन पर दिसंबर 2023 में सहमति बनी थी। ये आतंकी मकसद के लिए नई-उभरती वित्तीय प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल रोकने के लिए सदस्य देशों के लिए गैर-बाध्यकारी मार्गदर्शक सिद्धांत हैं।
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महासभा के पुनरुद्धार प्रयासों पर भारत प्रतिबद्ध
भारत ने संयुक्त राज्य महासभा (यूएनजीए) के ‘पुनरुद्धार’ की जरूरत पर जोर देते हुए सभी सदस्य देशों के साथ रचनात्मक और दूरदर्शी ढंग से काम करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। पुनरुद्धार पर एड-हॉक वर्किंग ग्रुप की एक बहस में बोलते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, पी. हरीश ने इसके पुनरोद्धार के लिए महत्वपूर्ण कदमों की रूपरेखा तैयार की और महासभा की सार्वभौमिक और अंतर-सरकारी प्रकृति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, भारत ने लगातार माना है कि यूएनजीए की स्थिति अद्वितीय है। इसकी सार्वभौमिकता और अंतर-सरकारी प्रकृति इस मण्डली को एक वैश्विक संसद के करीब बनाती है।
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