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दूषित भोजन बना वैश्विक संकट: हर साल 86 करोड़ से अधिक लोग बीमार, 15 लाख मौतें; बच्चों पर सबसे ज्यादा खतरा

Fri, 05 Jun 2026 06:41 AM IST
शिवम गर्ग अमर उजाला नेटवर्क, जिनेवा

सार

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार दूषित भोजन के कारण हर साल 86.6 करोड़ लोग बीमार पड़ते हैं और 15 लाख लोगों की मौत हो जाती है। पांच साल से कम उम्र के बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हैं।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की नई रिपोर्ट ने खाद्य सुरक्षा को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। रिपोर्ट के अनुसार दूषित और असुरक्षित भोजन के कारण दुनिया भर में हर साल लगभग 86.6 करोड़ लोग बीमार पड़ते हैं, जबकि करीब 15 लाख लोगों की मौत हो जाती है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस संकट का सबसे अधिक असर पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर पड़ रहा है। डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि सुरक्षित भोजन सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक स्तर पर तत्काल और समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है।

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रिपोर्ट के अनुसार पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चे दुनिया की आबादी का केवल लगभग 9 प्रतिशत हैं, लेकिन भोजनजनित बीमारियों के करीब एक-तिहाई मामलों का बोझ इन्हीं पर पड़ता है। उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पूरी तरह विकसित नहीं होने के कारण वे संक्रमण व विषैले तत्वों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक दूषित भोजन से होने वाले डायरिया जैसे संक्रमण बच्चों में तेजी से फैलते हैं और कई मामलों में जानलेवा साबित हो सकते हैं। वहीं भोजन में मौजूद सीसा और मिथाइलमरकरी जैसे जहरीले तत्व बच्चों के मस्तिष्क के विकास को प्रभावित कर सकते हैं। इससे उनकी सीखने की क्षमता, मानसिक विकास और दीर्घकालिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

बैक्टीरिया, वायरस और रसायन बने बड़ी वजह
रिपोर्ट में भोजनजनित बीमारियों के दो प्रमुख कारण बताए गए हैं। जैविक और रासायनिक खतरे। जैविक खतरों में बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी शामिल हैं, जो अधिकांश बीमारियों के लिए जिम्मेदार पाए गए। वर्ष 2021 में लगभग 86 करोड़ मामले ऐसे ही संक्रमणों से जुड़े थे। दूसरी ओर, रासायनिक प्रदूषण के मामले संख्या में कम होने के बावजूद अधिक घातक साबित होते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में दूषित भोजन से हुई कुल मौतों में लगभग 73 प्रतिशत मौतें रासायनिक तत्वों के कारण हुईं।
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अर्थव्यवस्था को भी भारी नुकसान
असुरक्षित भोजन का प्रभाव केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, भोजनजनित बीमारियों की वजह से हर साल लगभग 310 अरब अमेरिकी डॉलर का आर्थिक नुकसान होता है। विभिन्न देशों की जीवन-यापन लागत और क्रय शक्ति को ध्यान में रखने पर यह नुकसान बढ़कर लगभग 647 अरब डॉलर तक पहुंच जाता है।यह आर्थिक बोझ इलाज पर होने वाले खर्च, कामकाज में रुकावट और उत्पादकता में कमी के रूप में सामने आता है।

अफ्रीका व दक्षिण पूर्व एशिया पर सबसे भारी बोझ
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, भोजनजनित बीमारियों का प्रभाव सभी क्षेत्रों में समान नहीं है। अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र हैं। दुनिया भर में दर्ज लगभग तीन-चौथाई मामलों और 60 प्रतिशत से अधिक मौतों का बोझ इन्हीं क्षेत्रों पर है।रिपोर्ट बताती है कि सुरक्षित खाद्य आपूर्ति की कमी, स्वच्छ पेयजल तक सीमित पहुंच, कमजोर स्वच्छता व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी इस स्थिति के प्रमुख कारण हैं।

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