United States: अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन।
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मिड टर्म चुनावों के नतीजों से सत्ताधारी डेमोक्रेटिक पार्टी को मिली राहत टिकाऊ साबित नहीं होगी। ये राय राजनीतिक विश्लेषकों ने जताई है। उनके मुताबिक जो नतीजे आए हैं, उनसे प्रशासनिक गतिरोध का खड़ा होना तय है। हालांकि कांग्रेस (संसद) के ऊपरी सदन सीनेट में किस पार्टी को बढ़त मिलेगी, यह अभी तक तय नहीं हो पाया है, लेकिन निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में रिपब्लिकन पार्टी को हल्का बहुमत मिलता दिख रहा है। विश्लेषकों के मुताबिक एक सदन में भी बहुमत होने पर रिपब्लिकन पार्टी बाइडेन प्रशासन को पंगु बना देने में सक्षम हो जाएगी।
चुनाव नतीजे आने के बाद राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा कि ‘ये राहत की खबर है।’ इन चुनावों से पहले जनमत सर्वेक्षणों और मीडिया अनुमानों में रिपब्लिकन पार्टी की बड़ी जीत का अनुमान लगाया गया था। लेकिन असल में ऐसा नहीं हुआ। रिपब्लिकन पार्टी हल्की बढ़त ही बना पाई है। अमेरिकी मीडिया की टिप्पणियों में कहा है कि हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में उसे हल्का बहुमत मिलने का भी मतलब यह होगा कि नैंसी पेलोसी का स्पीकर का कार्यकाल खत्म हो जाएगा। संभवतया रिपब्लिकन नेता केविन मैकार्थी नए स्पीकर बनेंगे। इससे मैकार्थी वहां एजेंडा सेट करने की हैसियत में आ जाएंगे।
विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि रिपब्लिकन पार्टी के जीते सांसदों में धुर दक्षिणपंथी सदस्यों की काफी संख्या है। इन सदस्यों का दबाव मैकार्थी पर होगा। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक जो धुर दक्षिणपंथी सदस्य चुने गए हैं, उनमें मरजोरी टेलर ग्रीन भी हैं। ग्रीन भी स्पीकर बनने की महत्त्वाकांक्षा रखती हैं। लेकिन अनुमान है कि इसके लिए जरूरी समर्थन जुटाना उनके लिए मुश्किल होगा।
अखबार द गार्जियन ने अपने एक विश्लेषण में कहा है कि जो जनादेश आया, उसे किसी लिहाज से राष्ट्रीय एकता के पक्ष में नहीं कहा जा सकता। बल्कि यह जमीनी स्तर पर मौजूद तीखे ध्रुवीकरण का अधिक संकेत देता है। ऐसे में ये उम्मीद कम है कि रिपब्लिकन पार्टी सहयोग का रुख अपनाएगी और राष्ट्रपति के साथ के साथ द्विपक्षीय सहमति बनाने में वह दिलचस्पी लेगी।
टीकाकारों को आशंका है कि हाउस में बहुमत होने के कारण रिपब्लिकन पार्टी बाइडेन प्रशासन के खिलाफ कई मुद्दों पर संसदीय जांच शुरू कर देगी। इनमें राष्ट्रपति बाइडन के बेटे हंटर बाइडेन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप, अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना की अपमानजनक हार और कोरोना महामारी से निपटने के प्रशासन के विवादास्पद उपाय शामिल हैं। संसदीय विशेषज्ञों के मुताबिक मुमकिन है कि जांच किसी नतीजे पर ना पहुंचे, लेकिन इस सिलसिले में होने वाली सुनवाइयों में बाइडन प्रशासन को उलझना होगा।
विशेषज्ञों को आशंका है कि बाइडन प्रशासन को सबसे ज्यादा दिक्कत कर्ज सीमा बढ़वाने के मामले में आएगी। अमेरिका में सरकार उतना ही कर्ज ले पाती है, जो सीमा संसद तय करती है। अभी तय सीमा के मुताबिक बाइडन प्रशासन सिर्फ लगभग डेढ़ बिलियन डॉलर और कर्ज ले सकता है। जबकि उसे इससे कहीं ज्यादा रकम की जरूरत होगी। आशंका जताई गई है कि रिपब्लिकन बहुमत के कारण कर्ज सीमा बढ़ाने को संसदीय मंजूरी नहीं मिलेगी। उससे पूरा प्रशासन ठप हो जा सकता है।