अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी के नेता केविन मैकार्थी 15वें दौर के मतदान के बाद आखिरकार कांग्रेस (संसद) के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव के स्पीकर चुने गए। 1859 के बाद कभी भी हाउस के स्पीकर के चुनाव के लिए मतदान इतना लंबा नहीं खिंचा था। बीते नवंबर में हुए चुनाव में सदन में रिपब्लिकन पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिला। लेकिन पार्टी के धुर दक्षिणपंथी धड़े से जुड़े सदस्यों ने 14 दौर के मतदान तक मैकार्थी का निर्वाचन रोके रखा।
अमेरिकी मीडिया में आई खबरों के मुताबिक धुर-दक्षिणपंथी खेमे ने इस दौरान मैकार्थी को अपनी लगभग प्रमुख मांगों को मानने के लिए मजबूर कर दिया। समझा जाता है कि इस तरह लगभग 20 सांसदों वाला यह धुर-दक्षिणपंथी खेमा मौजूदा सदन के एजेंडे को अपने मुताबिक ढलवाने में सफल हो गया है। अमेरिकी वेबसाइट वॉक्स.कॉम के मुताबिक मैकार्थी और धुर दक्षिणपंथी खेमे में बनी सहमति के दस्तावेज का एक हिस्सा उसे हाथ लगा है। उसके मुताबिक मैकार्थी ने इस खेमे की कम से कम तीन प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया है।
दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते के मुताबिक मैकार्थी ने सरकार विनियोग विधेयकों और कर्ज सीमा के बारे में धुर-दक्षिणपंथी धड़े की मांग मान ली है। इसका मतलब यह होगा कि अगले दो साल हाउस में रिपब्लिकन पार्टी और डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच टकराव का नजारा देखने को मिलेगा। डेमोक्रेटिक हलकों में खास चिंता इस बात से पैदा हुई है कि अगर रिपब्लिकन पार्टी सरकार के कर्ज लेने की सीमा बढ़ाने पर राजी नहीं हुई, तो राष्ट्रपति जो बाइडन के लिए प्रशासन चलाना बेहद मुश्किल हो जाएगा। .
मैकार्थी वह नियम बदलने के लिए भी राजी हो गए हैं, जिससे स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना आसान हो जाएगा। विश्लेषकों के मुताबिक यह मांग मान कर मैकार्थी ने अपने सिर पर तलवार लटका ली है। इससे हमेशा उन्हें धुर दक्षिणपंथी सदस्यों के साये में काम करना पड़ेगा। इसके अलावा मैकार्थी इस बात पर भी राजी हो गए हैं कि सदन की शक्तिशाली कमेटियों में धुर-दक्षिणपंथी खेमे के सदस्यों को प्रमुखता से जगह दी जाएगी। वेबसाइट वॉक्स के मुताबिक इसके अलावा मैकार्थी ने धुर दक्षिणपंथी सदस्यों से कई निजी वायदे भी किए हैं।
स्पीकर के चुनाव को लेकर इस हफ्ते जो गतिरोध देखने को मिला, उससे अमेरिकी लोकतंत्र के भविष्य को लेकर नई चिंताएं खड़ी हो गई हैं। इससे यह धारणा बनी है कि धुर-दक्षिणपंथी गुट अपनी कम ताकत के बावजूद रिपब्लिकन पार्टी को मनमाफिक ढंग से चलाने और उसके जरिए सारे देश पर अपना एजेंडा थोपने में सक्षम हो गया है। यह संकेत भी मिला है कि अब ये धड़ा खुद उन नेताओं के हाथ से निकल गया है, जिनकी वजह से धुर-दक्षिणपंथी एजेंडा अमेरिका में लोकप्रिय हुआ।
टीवी चैनल सीएनएन के विश्लेषक स्टीफन कॉलिन्स ने अपनी एक टिप्पणी में लिखा है- ‘मैकार्थी इस बात की ताजा मिसाल बने हैं कि ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ (मागा) नाम की जिस क्रांति को उग्रपंथियों ने लोकप्रिय बनाया, वह कैसे खुद से जुड़े रहे नेताओं को ही निगलने लगी है।’ उन्होंने लिखा है- ‘खुद डोनाल्ड ट्रंप भी मैकार्थी को समर्थन देने के लिए धुर-दक्षिणपंथियों को प्रेरित नहीं कर पाए, जबकि इस क्रांति के लेखक वे ही रहे हैं। उन्होंने ही 2020 के राष्ट्रपति चुनाव परिणाम को स्वीकार करने से इनकार कर कट्टररपंथियों को ताकतवर बनाया।’