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चीन पहुंची संयुक्त राष्ट्र की टीम: क्या अब दुनिया के सामने आ जाएगा शिनजियांग का सच?

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 27 Apr 2022 05:37 PM IST

सार

संयुक्त राष्ट्र के किसी मानवाधिकार आयुक्त ने 2005 के बाद शिनजियांग की यात्रा नहीं की है। थ्रोसेल ने बताया- ‘अभी चीन पहुंचा दल शिनजियांग भी जाएगा। वह बीजिंग और दूसरे स्थलों का दौरा भी करेगा। बातचीत से दौरे से संबंधित नियमों पर सहमति बन गई है।’
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उइघुर - फोटो : Agency (File Photo)


हागकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक चीन पहुंचे संयुक्त राष्ट्र के दल को फिलहाल ग्वांगझाऊ में क्वैरंटीन में रखा गया है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की प्रवक्ता लिज थ्रोसेल ने बताया कि पांच सदस्यों का ये दल चीन सरकार के आमंत्रण पर आया है।

किसी मानवाधिकार आयुक्त की 17 साल बाद यात्रा

चीन लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र की टीम के शिनजियांग प्रांत के दौरे का विरोध कर रहा था। आरोप है कि शिनजियांग प्रांत में चीन उइघुर मुस्लिम समुदाय का दमन कर रहा है। इसकी जांच के लिए संयुक्त राष्ट्र का दल भेजने की मांग कई वर्षों से हो रही थी। चीन ने 2018 से इस बारे में बातचीत शुरू की। संयुक्त राष्ट्र की मांग थी कि उसके दल को शिनजियांग में लोगों से बिना किसी निगरानी के ‘बेरोक और सार्थक’ बातचीत करने का मौका दिया जाए। पिछले महीने बैशलेट ने बताया था कि शिनजियांग यात्रा को लेकर उनकी चीन सरकार के साथ सहमति बन गई है।



संयुक्त राष्ट्र के किसी मानवाधिकार आयुक्त ने 2005 के बाद शिनजियांग की यात्रा नहीं की है। थ्रोसेल ने बताया- ‘अभी चीन पहुंचा दल शिनजियांग भी जाएगा। वह बीजिंग और दूसरे स्थलों का दौरा भी करेगा। बातचीत से दौरे से संबंधित नियमों पर सहमति बन गई है।’


चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र की टीम सोमवार को चीन पहुंची। उन्होंने कहा- ‘संयुक्त राष्ट्र आयुक्त की यात्रा का मकसद दोनों पक्षों के बीच संवाद और सहयोग को आगे बढ़ाना होगा। हमने हमेशा राजनीतिक लाभ उठाने के लिए इस मुद्दे के इस्तेमाल का विरोध किया है।’

‘पुनर्शिक्षण’ शिविर बनाए

पश्चिमी देशों का आरोप है कि चीन ने 2017 के बाद से शिनजियांग प्रांत में बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लेकर उन्हें शिविरों में डाल दिया है। वहां उनका ‘पुनर्शिक्षण’ किया जा रहा है। यह एक तरह से उइघुर और तुर्क मूल के अन्य मुसलमानों का उत्पीड़न है। साथ ही चीन पर इस प्रांत में लोगों से जबरिया मजदूरी कराने का आरोप भी हैं। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि यहां जबरन लोगों के परिवार नियोजन ऑपरेशन किए गए हैं।


 

चीन सरकार ने ऐसे तमाम आरोपों का खंडन किया है। उसका दावा है कि उसने शिनजियांग में आतंकवाद विरोधी नियमों को लागू किया है। साथ ही वहां गरीबी मिटाने के कार्यक्रम को तेजी से चलाया गया है। लोगों को हिरासत में शिविरों में रखने के बाद में चीन का दावा है कि ये शिविर पेशवर ट्रेनिंग के केंद्र हैं।


अब ये संभावना जताई गई है कि मिशेल बैशलेट की यात्रा से लंबे समय से चल रहे इस विवाद पर से परदा हटेगा। उनकी यात्रा से पहले आई टीम के प्रति चीनी अधिकारी कैसा रुख अपनाते हैं, उससे संकेत मिलेगा कि शिनजियांग का सच सामने लाने को लेकर उनका नजरिया कैसा है। इसीलिए इस दौरे पर सारी दुनिया की नजर है।

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