पाकिस्तान में जनसंख्या नियंत्रण के उपाय मोटे तौर पर नाकाम साबित हुए हैं। ये बात इस वर्ष 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस के मौके पर जारी संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट से सामने आई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक अगले 28 वर्षों में पाकिस्तान की आबादी आज की तुलना में 56 प्रतिशत बढ़ जाएगी। पाकिस्तान दुनिया के उन देशों में है, जहां आबादी बढ़ने की दर वैश्विक दर से ज्यादा है।
‘विश्व जनसंख्या संभावना 2022’ नाम से आई रिपोर्ट में यह बताया गया कि दुनिया की आबादी अभी सात अरब 70 करोड़ है, जो 2080 तक बढ़ कर 10 अरब 40 करोड़ हो जाएगी। पहले जो अनुमान लगाए गए थे, उसके मुताबिक साल 2100 में विश्व की जनसंख्या को दस अरब तक पहुंचना था। समझा जाता है कि पाकिस्तान जैसे देशों में जनसंख्या नियंत्रण में दिखी कमजोरी के कारण विश्व जनसंख्या नियंत्रण की रफ्तार कमजोर पड़ी है।
रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि जनसंख्या वृद्धि में जो देश ज्यादा योगदान कर रहे हैं, उनमें पाकिस्तान प्रमुख है। 1990 में पाकिस्तान की जनसंख्या 11 करोड़ 40 लाख थी। तब दुनिया की सर्वाधिक जनसंख्या वाले देशों की सूची में वह आठवें नंबर पर था। अब वह पांचवें नंबर पर पहुंच गया है। इस समय पाकिस्तान की आबादी 22 करोड़ से ज्यादा है। आबादी में बढ़ोतरी की वजह देश में जन्म दर अपेक्षित गिरावट न आना है। जन्म दर न गिरने के कारण आबादी में बढ़ोतरी को नकारात्मक घटना के रूप में देखा जाता है। मृत्यु दर घटने के कारण अगर आबादी बढ़ती है, तो उसे प्रगति या विकास का लक्षण माना जाता है।
इस वर्ष मई में गैर सरकारी संस्था- पाकिस्तान एंडोक्राइन सोसायटी (पीईएस) के सम्मेलन के दौरान एक रिपोर्ट जारी हुई थी। उसमें बताया गया था कि पाकिस्तान में 40 लाख विवाहित दंपति संतानहीन हैं। ऐसा पति-पत्नी में से किसी एक की शारीरिक कमजोरी के कारण हुआ है। उस सम्मेलन में विशेषज्ञों ने कहा था कि जीवन शैली में आ रहे बदलावों के कारण आबादी के एक हिस्से में जन्म दर घटी है। इसके पहले 2014 में विश्व बैंक की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि परिवार पालने संबंधी बढ़ रही चुनौतियों के कारण अब पाकिस्तानी पुरुष परिवार नियोजन में दिलचस्पी ले रहे हैं। लेकिन ताजा रिपोर्ट से संकेत मिला है कि ये तमाम रुझान आबादी के एक छोटे तबके तक सीमित हैं।
विशेषज्ञों ने ध्यान दिलाया है कि 2050 तक आबादी में 56 फीसदी बढ़ोतरी का मतलब होगा कि तब तक देश की जनसंख्या का 35 करोड़ पार कर जाएगी। तब इतनी बड़ी आबादी को भोजन, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और अन्य सार्वजनिक सेवाओं को उपलब्ध कराने की चुनौती पाकिस्तान के सामने होगी।
आज देश आर्थिक और सामाजिक दुर्दशा का शिकार है। एक रिपोर्ट के मुताबिक 2010 से 2021 के बीच एक करोड़ 65 लाख पाकिस्तान विदेशों में मजदूरी करने चले गए। ऐसा देश में रोजगार अवसरों की कमी के कारण हुआ। इसीलिए ताजा रिपोर्ट आने के बाद यह चिंता जताई जा रही है कि जब पाकिस्तान अभी अपनी आबादी को जीने की न्यूनतम सुविधाएं नहीं दे पा रहा है, तो 2050 में ऐसा कर पाएगा?