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संयुक्त राष्ट्र: परमाणु तकनीक पर भारत का रुख स्पष्ट, सुरक्षित और शांतिपूर्ण इस्तेमाल पर दिया जोर

Sat, 24 Oct 2026 09:08 AM IST
अस्मिता त्रिपाठी एएनआई, न्यूयॉर्क

सार

संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारतीय सांसद संगीता कुमारी सिंह देव ने परमाणु विज्ञान और तकनीक के सुरक्षित, संरक्षित व शांतिपूर्ण इस्तेमाल के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।  वहीं, कई देशों ने भारत की विकास सहायता और साझेदारी के लिए आभार जताया।
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भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल की नेता, संगीता कुमारी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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परमाणु विज्ञान और प्रौद्योगिकी के सुरक्षित, संरक्षित और शांतिपूर्ण उपयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, संसद सदस्य और भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल की नेता, संगीता कुमारी सिंह देव ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में इस प्रतिबद्धता को फिर से साफ किया। इसके साथ ही कई देशों ने विकास कार्यों में मदद के लिए भारत का धन्यवाद किया।
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संयुक्त राष्ट्र महासभा में 'अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की रिपोर्ट' पर चर्चा करते हुए, उन्होंने परमाणु विज्ञान के शांतिपूर्ण अनुप्रयोगों के लिए नियामक ढांचे सहित, सदस्य देशों की मानवीय और संस्थागत क्षमताओं को विकसित करने में आईएईए की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।

संगीता कुमारी ने क्या कहा? 
संयुक्त राष्ट्र में भारतीय मिशन ने एक्स पर लिखा, 'भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल के नेता और सांसद संगीता कुमारी सिंह देव ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में 'अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की रिपोर्ट' पर अपना बयान दिया। उन्होंने परमाणु विज्ञान और प्रौद्योगिकी के सुरक्षित, संरक्षित और शांतिपूर्ण उपयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही, उन्होंने सतत विकास में आईएईए की महत्वपूर्ण भूमिका और परमाणु प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हुई अहम प्रगति पर प्रकाश डाला।
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उन्होंने आईएईए के 'तकनीकी सहयोग कार्यक्रम' और उसकी प्रमुख पहलों के प्रति समर्थन जताया। इसके अलावा, उन्होंने 'दक्षिण-दक्षिण सहयोग' के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर जोर दिया, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि परमाणु विज्ञान का लाभ उन सभी देशों तक पहुंचे जो इसे चाहते हैं, और साथ ही एक मजबूत परमाणु सुरक्षा और संरक्षा ढांचा भी कायम रहे।'

इस बीच, 22 अक्तूबर को आयोजित 'इंडिया-यूएन डेवलपमेंट पार्टनरशिप फंड' के नौवें वार्षिक कार्यक्रम में, लाओस, श्रीलंका, तंजानिया, माइक्रोनेशिया, मोल्दोवा, मोरक्को और सेंट लूसिया ने विकास कार्यों में मदद के लिए भारत का धन्यवाद किया।

मोल्दोवा के स्थायी प्रतिनिधि ने क्या कहा? 
संयुक्त राष्ट्र में मोल्दोवा के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत जॉर्जे ल्यूका ने कहा, 'इसने जनसंख्या डेटा को बेहतर सार्वजनिक नीतियों में बदलने की हमारी क्षमता को मजबूत किया है।' ओडीए (आधिकारिक विकास सहायता) पर दबाव के इस दौर में, भारत की निरंतर प्रतिबद्धता एक महत्वपूर्ण संदेश देती है। 'आपसी एकजुटता, सम्मान और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर आधारित साझेदारी से ठोस परिणाम मिलते रह सकते हैं।'

फालेफौ ने भारत सरकार को लेकर क्या कहा? 
वहीं, सभा को संबोधित करते हुए, संयुक्त राष्ट्र में तुवालु के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत तापूगाओ फालेफौ ने जमीनी स्तर की शिक्षा और स्थानीय बुनियादी ढांचे पर भारतीय पहलों के दूरगामी प्रभावों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय निवेश से निश्चित रूप से सैकड़ों स्कूलों और संस्थानों को लाभ मिलेगा। यह परियोजना ऐसे विकास का महत्व दिखाती है जो राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप हो। तुवालु, भारत सरकार से मिली विकास सहायता के लिए अत्यंत आभारी है।

संयुक्त राष्ट्र में सेंट लूसिया की स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत मेनिसा रामबली ने भी विकासशील देशों को सशक्त बनाने में इस फंड की अहम भूमिका पर जोर दिया।  रामबली ने कहा, 'इस फंड के कई उद्देश्य हैं। यह 'ग्लोबल मेजॉरिटी' (विकासशील दुनिया) के देशों में आर्थिक और सामाजिक विकास को बढ़ावा देता है। 'ग्लोबल मेजॉरिटी' में क्षमता निर्माण के मामले में यह फंड एक महत्वपूर्ण मिसाल है'
इसके व्यापक विकासात्मक प्रभाव को रेखांकित करते हुए, रामबली ने आगे कहा, 'भारत-संयुक्त राष्ट्र फंड द्वारा दिया गया सहयोग बहुत मददगार साबित हो रहा है, क्योंकि कई देश आर्थिक और सामाजिक विकास के विभिन्न क्षेत्रों में आने वाली चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।'
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