फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भारत की दो टूक : हिंदू, सिख, बौद्धों पर हिंसा स्वीकारने में नाकाम रहा संयुक्त राष्ट्र

Fri, 04 Dec 2020 02:07 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, संयुक्त राष्ट्र।
विज्ञापन
यूएन में भारत के स्थायी मिशन के सचिव आशीष शर्मा. - फोटो : Twitter
विज्ञापन

धर्मों के खिलाफ हिंसा की निंदा करते हुए भारत ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) हिंदू, बौद्ध, सिख धर्म के विरुद्ध बढ़ती नफरत और हिंसा को स्वीकार करने में नाकाम रहा है।

विज्ञापन


भारत ने कहा, हिंदुत्व से घृणा करने वालों व सिख-बौद्ध धर्म को निशाना बनाने वाले हिंसक कट्टरपंथियों के विरुद्ध यूएन सख्त रुख अपनाए। उसने कहा, शांति की संस्कृति सिर्फ अब्राहमिक धर्म के लिए नहीं हो सकती। 


संयुक्त राष्ट्र में भारतीय मिशन के प्रथम सचिव आशीष शर्मा ने फ्रीडन ऑफ रिलीजन या बिलीफ पर प्रस्ताव का जिक्र करते हुए कहा, हम पूरी तरह से सहमत हैं कि यहूदी-विरोधी, इस्लामफोबिया और ईसाई-विरोधी कृत्यों की निंदा करने की जरूरत है और भारत इस तरह के कृत्यों की दृढ़ता से निंदा करता है। लेकिन ऐसे अहम मुद्दों पर संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव सिर्फ तीन अब्राहमिक धर्मों - यहूदी, ईसाई और इस्लाम पर हैं। ऐसी चयनात्मकता क्यों?
विज्ञापन


शर्मा यूएनजीए के 75वें सत्र में कल्चर ऑफ पीस विषय पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा, आज पूरी दुनिया में निराशाजनक रुझान है। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि यूएन को हिंदूफोबिया के खिलाफ अपना रुख साफ करना चाहिए। शांति की संस्कृति केवल अब्राहमिक धर्मों के लिए नहीं हो सकती और जब तक इसमें चयनात्मकता रहेगी दुनिया कभी भी शांति की संस्कृति को बढ़ावा नहीं दे सकेगी।

क्या है अब्राहमिक धर्म
यूएन में तीन अब्राहमिक धर्मों के नाम का ड्राफ्ट 33 यूरोपीय देशों ने प्रायोजित किया, जो मुख्य रूप से ईसाई हैं और कोई भी इस्लामी देश या इस्राइल इसे प्रायोजित करने में शामिल नहीं हुआ। इस ड्राफ्ट को पिछले महीने तीसरी समिति ने मंजूरी दी थी। इसमें केवल इस्लामोफोबिया, यहूदी-विरोधी और ईसाई धर्म से प्रेरित मामलों को निर्दिष्ट किया गया है। अन्य धर्मों के लिए सिर्फ पूर्वाग्रह न रखने का एक वाक्य लिखा गया है।

करतारपुर साहिब गुरुद्वारे के प्रबंधन में बदलाव पर उठाए सवाल
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव आशीष शर्मा ने कहा कि पाकिस्तान पहले ही इस सभा की ओर से पिछले साल पारित शांति की संस्कृति को लेकर प्रस्ताव तोड़ चुका है। भारत ने करतारपुर साहिब गुरुद्वारा प्रबंधन में पाक द्वारा किए बदलावों पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि करतारपुर साहिब का प्रशासनिक नियंत्रण भी सिख समुदाय की जगह गैर-सिख समुदाय को स्थानांतरित कर दिया गया। उसका यह कदम सिख धर्म और उसके संरक्षण के खिलाफ है। जबकि पवित्र करतारपुर साहिब गुरुद्वारे का जिक्र पहले के प्रस्ताव में भी है, जिसका उल्लंघन पाकिस्तान की ओर से किया गया है।

पाक को लताड़ा : दुनियाभर में शांति के लिए खतरा है पाक
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के सचिव आशीष शर्मा ने कहा कि यदि पाकिस्तान भारत में धर्मों के खिलाफ नफरत की अपनी मौजूदा संस्कृति को बदलता है और सीमा पार से होने वाले आतंकवाद के समर्थन को रोकता है तो हम दक्षिण एशिया और इसके बाहर शांति की वास्तविक संस्कृति का प्रयास कर सकते हैं।

भारत ने पाक का नाम लिए बिना उससे एक बार फिर सीमा पार से आतंकियों को मिल रहे समर्थन पर रोक की मांग की है। भारत ने यह साफ किया कि पाकिस्तान दुनियाभर की शांति के लिए खतरा बना हुआ है। उसके खिलाफ कड़े कदम उठाए जाने चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें