स्वच्छ समुद्र अभियान
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने प्लास्टिक से होने वाले नुकसान के बारे में सोमवार को एक जागरूकता अभियान शुरू किया है जिसका नाम है - "What's in Your Bathroom?" "आपके बाथरूम में क्या है?"
इसमें कहा गया है कि रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाली चीजों में अक्सर प्लास्टिक का बहुत बड़ा हिस्सा होता है और ये चीजें लोगों के स्वास्थ्य के लिए खासा नुकसान कर सकती हैं।
साथ ही लोगों से ये भी कहा जा रहा है कि किस तरह उनके प्रयासों से प्लास्टिक की मौजूदगी और स्वास्थ्य व पर्यावरण पर उसके नुकसान को कम करने में किस तरह से दिशा बदली जा सकती है।
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने वर्ष 2017 में स्वच्छ समुद्र अभियान शुरू किया था जिसके तहत सिर्फ एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक और उसके बारीक कणों से निपटने के लिए विश्व स्तर पर मुहिम शुरू करने का आहवान किया गया था।
ये अब उस अभियान का दूसरा चरण है, इसके तहत समुद्री कूड़े-कचरे के विभिन्न पहलुओं और उसके नुकसान पर प्रकाश डाला जा रहा है, मसलन कॉस्मेटिक उद्योग यानी श्रृंगार व प्रसाधन वस्तुओं से पैदा होने वाला प्लास्टिक प्रदूषण। बहुत से लोगों को तो ये जानकारी ही नहीं होती है कि रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीजों में कितनी प्लास्टिक होती है जो वो अपने चेहरे और शरीर की देखभाल के लिए प्रयोग करते हैं।
चीजों की पैकेजिंग से लेकर उनकी सुंदरता बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होने वाले बारीक कण, जो अक्सर पानी के साथ बह जाने के लिए बनाए जाते हैं, ये सफर तय करके अंत में नदियों में और सबसे आखिर में समुद्रों में पहुंचते हैं। माइक्रोप्लास्टिक यानी प्लास्टिक के बारीक कण इतने छोटे होते हैं कि उन्हें कूड़े-कचरे के प्रबंधन में शामिल ही नहीं किया जा सकता। इतना ही नहीं, वो बारीक कण जल आधारित कई जहरीले पदार्थों और बैक्टीरिया को आकर्षित करते हैं।
चूंकि वो खाद्य पदार्थों जैसे नजर आते हैं, उन्हें मछलियां, अन्य कीड़े-मकौड़े व अन्य समुद्री जीव खा लेते हैं। इससे उनकी पाचन प्रक्रिया और तंत्र प्रभावित होते हैं जिससे उन्हें कई तरह की जटिलताएं पैदा हो जाती हैं। समुद्री जीवन को खतरा पैदा करने के अलावा माइक्रोप्लास्टिक का इंसानी स्वास्थ्य पर कितना असर होता है, अभी इस बारे में ठोस जानकारी नहीं है। लेकिन चूंकि ये माइक्रोप्लास्टिक कपड़ों, खाद्य-पदार्थों, पानी और कॉस्मेटिक्स यानी प्रसाधन चीजों में इस्तेमाल होती हैं तो इनके हानिकारक प्रभाव भी काफी ज्यादा होने की संभावनाएं हैं।
संयुक्त राष्ट्र परियावरण कार्यक्रम ने अगले सप्ताह से दुनिया भर में उपभोक्ताओं को अपने बाथरूम में इस्तेमाल होने वाली चीजों का मूल्यांकन करने और माइक्रोप्लास्टिक के इस्तेमाल के बजाय बेहतर व स्वस्थ वैकल्पिक पदार्थों का प्रयोग करने का निमंत्रण दिया है।