कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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यूनाइटेड किंगडम की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा ने एक जरूरी कॉल जारी की है, जिसमें यूके ने भारत और दक्षिण एशिया विरासत के लोगों को अपना प्लाज्मा डोनेट करने की बात ही है। जो लोग कोविड-19 से रिकवर हो चुके हैं, वो अपना प्लाज्मा यूनाइटेड किंगडम की जनता के लिए डोनेट कर सकते हैं ताकि उनकी जिंदगियां बचाई जा सके।
जानकारों के मुताबिक, गोरे लोगों की तुलना से दक्षिण एशिया के लोगों के शरीर में ज्यादा एंटीबॉडी बनती हैं, इससे किसी दूसरे की जान आसानी से बचाई जा सकती है। एनएचएस ने कहा कि एंटीबॉडी सहित प्लाज्मा से कई कोरोना संक्रमिल मरीजों की जान बचाई जा सकती है।
इसलिए देश में कोरोना की दूसरी लहर आने के डर से इसकी मागं की जा रही है। हमें एशियन कम्यूनिटी से बहुत अच्छा जवाब मिला है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा ब्लड एंड ट्रांसप्लांट की कंसल्टेंट रक्तविशेषज्ञ रेखा आनंद का कहना है कि कोविड-19 एशियन कम्यूनिटी के लोगों को ज्यादा संक्रमित कर रहा है और ऐसे में प्लाज्मा डोनेट करने से किसी की जान बचाई जा सकती है।
एनएचएसबीटी की कंसल्टेंट डोनर मेडिसिन डॉ श्रुति नारायण का कहना है कि प्लाज्मा डोनेट करना सुरक्षित, साफ और सरल प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया में 45 मिनट लगते हैं और आपके शरीर में जल्द ही प्लाज्मा और एंटीबॉडी को रिप्लेस किया जाता है। उन्होंने कहा कि क्योंकि आपकी लाल रक्त कोशिका आपके पास वापस आ जाती हैं, इसलिए आप सामान्य दिनों की तरह अपनी दिनचर्या चला सकते हैं।
एनएचएसबीटी के क्लीनिकल सपोर्ट टीम के डॉ सुहैल असघर का कहना है कि कुछ लोग प्लाज्मा डोनेट करने से पहले डरे हुए होते हैं। हमारी डोनेटश टीम ऐसे लोगों का ध्यान रखती है और उन्हें डोनेट करने से पहले अच्छा और बेहतर महसूस कराती है। टीम की ओर से ऐसे लोगों को ये समझाया जाता है कि प्लाज्मा डोनेट करने से आप किसी की जान बचा सकते हैं।
यूनाइटेड किंगडम के सभी मुख्य शहरों और नगरों में प्लाज्मा सेंटर बना दिए गए हैं। एनएचएसबीटी के डोनर मेडिसिन के कंसल्टेंट डॉ नाइम अख्तर का कहना है कि प्लाज्मा डोनेशन लोगों की मदद करने का एक तरीका है। प्लाज्मा डोनेट करने से आप कोरोना वायरस से जूझ रहे किसी मरीज की जान बचा सकते हैं ताकि वो और समय अपने परिवार के साथ बिता सके।
एनएचएसबीटी कैंपेन में दक्षिण एशिया विरासत के कई जानकार शामिल हैं। इस हफ्ते की शुरुआत में यूनाइटेड किंगडम ने भारत और दक्षिण एशिया के जन्मे लोगों से प्लाज्मा डोनेट करने की बात कही थी।