अमेरिका की एक प्रभावशाली सांसद ने बुधवार को डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की आलोचना की। उन्होंने कहा कि रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत को धमकाना गलत है। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वर्षों की मेहनत से बनाए गए संबंधों को कुछ ही महीनों में खत्म कर दिया गया।
डेमोक्रेटिक पार्टी की सीनेटर जीन शाहीन ने यह बयान ऐसे समय में दिया है, जब भारत और अमेरिका के संबंधों में गिरावट आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय सामानों पर टैरिफ (शुल्क) बढ़ाकर 50 फीसदी कर दिया है, जिसमें रूस से कच्चा तेल खरीदने के चलते 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ भी शामिल है।
सीनेटर शाहीन ने वॉशिंगटन में 'काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस' में कहा, मेरे हिसाब से विदेश नीति का मकसद हमेशा अमेरिका के हितों को आगे बढ़ाना होना चाहिए, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियों ने ऐसा नहीं किया। इसके विपरीत, उन्होंने वह सब खत्म दिया है जो अमेरिका ने छह दशकों में दुनिया में सम्मान और प्रभाव से हासिल किया था।
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जब शाहीन से पूछा गया कि क्या चीन पर भी भारत की तरह 50 फीसदी का टैरिफ लगाया जाना चाहिए, तो उन्होंने कहा, हां, मुझे ऐसा लगता है। उन्होंने आगे कहा, राष्ट्रपति ने चीन पर सख्त टैरिफ इसलिए नहीं लगाए क्योंकि जब उन्होंने पहले चीन पर टैरिफ की बात की थी, तो चीन ने जवाब दिया था- ठीक है, आप टैरिफ लगाइए, हम आपको दुर्लभ खनिज (रेअर अर्थ मिनरल्स) और दूसरी चीजें देना बंद कर देंगे जिनको लेकर आप हम पर निर्भर हैं।
शाहीन ने कहा, मुझे लगता है कि यही सब चल रहा है... और यह मेरे लिए बहुत दुखद है कि भारत और प्रधानमंत्री मोदी के साथ जो संबंध वर्षों की मेहनत से बने थे, वह कुछ महीनों में ही खत्म हो गए। शाहीन अमेरिका की सीनेट की विदेश मामलों की समिति में वरिष्ठ सदस्य हैं और रक्षा मामलों की समिति में भी अहम पद पर हैं। उन्होंने ट्रंप की विदेश नीति में मौजूद विरोधाभासों की ओर ध्यान दिलाया।
उन्होंने कहा, हम ब्राजील पर टैरिफ लगा रहे हैं जबकि वहां हमारा व्यापार अधिशेष (ज्यादा कमाई) है। हम भारत को धमका रहे हैं क्योंकि वह रूस से तेल खरीद रहा है, लेकिन जब बात चीन की आती है तो हम आंखें मूंद लेते हैं। शाहीन ने हाल ही में चीन के तियानजिन शहर में हुए शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन की भी बात की। उन्होंने कहा, आप बस वो तस्वीरें देखिए जिसमें प्रधानमंत्री मोदी, रूसी राष्ट्रपति पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक साथ हाथ पकड़े खड़े थे।