संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने पाकिस्तान से महरंग बलोच समेत सभी बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को रिहा करने और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई न करने को कहा है।
संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के विशेष दूत ने एक बयान में कहा, बलूच अधिकारों की वकालत करने वाली बलूच यकजेहती समिति (बीवाईसी) के विरोध प्रदर्शनों पर पुलिस की कार्रवाई चिंता का विषय है। हमले के बाद, पाकिस्तान के आतंकवाद निरोधी विभाग ने कई प्रमुख बीवाईसी सदस्यों को या तो गिरफ्तार कर लिया या गायब कर दिया।
बीवाईसी ने मंगलवार को हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग करते हुए बलूचिस्तान विश्वविद्यालय के बाहर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन किया, लेकिन क्वेटा पुलिस ने हमला कर उन्हें भगा दिया। इस घटना में तीन प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई, कई अन्य घायल हो गए और दर्जनों गिरफ्तार हो गए।
विशेषज्ञों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग की निंदा की। कहा कि इस तरह के उपाय विद्रोहियों के हमले से हुए दर्द पर मरहम नहीं लगा सकते।
सरकार और सेना पर शोषण का आरोप
बलूचिस्तान के लोगों का आरोप है कि पाकिस्तानी सरकार और सेना उनके संसाधनों का शोषण करती है और उनकी जमीन पर बाहरी लोगों को बसाया जा रहा है। उनकी सांस्कृतिक पहचान को मिटाने की कोशिश की जा रही है। सबसे गंभीर मुद्दा उनके लोगों का अचानक गायब हो जाना है। इन्हीं को लेकर पाकिस्तान में पिछले दिनों प्रदर्शन किए गए थे। महरंग बलोच, सम्मी दीन बलोच, सीमा बलोच और फरजाना मजीद बलोच बलूचिस्तान के संघर्ष में ये कुछ नाम ऐसे हैं, जिन्होंने न सिर्फ अपने दुखों को सामूहिक संघर्ष में बदला, बल्कि पाकिस्तानी सेना और सरकारी सिस्टम को भी हिला दिया।