यूनीसेफ ने हाल ही में कहा है कि दक्षिण एशियाई देशों में गर्मी बढ़ने का बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है। भारत की राजधानी दिल्ली सहित देश के उत्तरी राज्यों में तापमान 43 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया। देश में हीटवेव का अलर्ट जारी किया गया है। पाकिस्तान के मौसम विभाग ने भी 23 से 27 मई तक गम्भीर लू जारी रहने की चेतावनी जारी की थी। पाकिस्तानी प्रान्त पंजाब में तो 25 से 31 मई तक स्कूल बन्द कर दिए हैं। यूनीसेफ़ के अनुसार पूरे दक्षिण एशिया क्षेत्र में बढ़ता पारा, लाखों बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर सकता है।
यूनीसेफ की सलाह- बच्चों को भरपूर पानी पिलाएं
यूनीसेफ ने कहा है कि बच्चों को गर्मी के असर से बचाने के लिए उन्हें भरपूर मात्रा में पानी पिलाया जाना चाहिए। दरअसल बच्चे, वयस्कों की तरह बदलते तापमान के हिसाब से तेजी से समायोजित नहीं हो सकते, ऐसे में उन्हें गर्मी में ज्यादा खतरा है। बच्चों के शरीर का तापमान बढ़ने से उनके दिल की धड़कन तेज हो जाती है और तेज सिरदर्द होता है। शरीर में जकड़न और बेहोशी भी हो सकती है। शरीर में पानी की कमी की वजह से हीटस्ट्रोक और डायरिया का भी खतरा है। हालात बिगड़ने पर शरीर के अंग काम करना भी बंद कर सकते हैं।
यूनिसेफ का कहना है कि अत्यधिक गर्मी में लंबे समय तक रहने से बच्चों का दिमागी विकास भी प्रभावित हो सकता है। इससे बच्चों के सीखने, याद करने में परेशानी हो सकती है। गर्भवती महिलाओं में भी गर्मी की वजह से परेशानी हो सकती है और हालात बिगड़ने पर गर्भ में ही बच्चे की मौत तक हो सकती है।
लगातार निगरानी की जरूरत
यूनीसेफ का कहना है कि बच्चे, गर्मी से बचाव के लिए बड़ों पर निर्भर होते हैं इसलिए माता-पिता और अभिभावकों को अपने बच्चों को दिन भर उनके भीतर तरल पदार्थों की कमी नहीं होने देने के लिए, चौकन्ना रहना होगा। बच्चों को गर्मी सम्बन्धी बीमारियों से बचाने के लिए, उन्हें बार-बार यह जाँच करते रहनी होगी कि बच्चे प्यासे तो नहीं हैं, उन्हें पसीना तो नहीं आ रहा है और उनका शरीर बहुत गर्म तो नहीं, या फिर उन्हें उबकाई तो नहीं हो रही है। यदि बच्चों का मुंह सूख रहा है या फिर उन्हें सिर दर्द हो रहा है तो ध्यान देने की जरूरत है। गर्मी के दौरान बच्चों को ढीले-ढाले कपड़े पहनाना चाहिए।
यूनीसेफ के वर्ष 2020 के आंकड़ों पर आधारित एक विश्लेषण के अनुसार, दक्षिण एशिया में 18 वर्ष से कम उम्र के लगभग 76 प्रतिशत यानि लगभग 46 करोड़ बच्चे, अत्यधिक उच्च तापमान के माहौल में रहे, जब एक वर्ष में 83 या उससे अधिक दिनों के दौरान तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहा। यूनीसेफ़ के 2021 के बाल जलवायु जोखिम सूचकांक (CCRI) के अनुसार, अफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश, भारत और पाकिस्तान में बच्चे, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अत्यधिक उच्च जोखिम की चपेट में हैं।
(नोट: यह लेख संयुक्त राष्ट्र हिंदी समाचार सेवा से लिया गया है।)