संयुक्त राष्ट्र महासभा ने शुक्रवार को 2020 के लिए लगभगग 21 हजार करोड़ रुपये (3.07 अरब अमेरिकी डॉलर) का अपना परिचालन बजट निर्धारित किया है। बजट में पहली बार सीरिया और म्यांमार में युद्ध अपराधों की जांच के लिए धनराशि का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही म्यांमार में रोहिंग्या मुस्लिमों पर अत्याचार और उनके मानवाधिकार उल्लंघन का प्रस्ताव भी पारित हुआ।
यूएन के 193 सदस्य देशों में से 134 ने प्रस्ताव का समर्थन और नौ देशों ने विरोध किया। जबकि 28 देश वोटिंग में शामिल नहीं हुए। प्रस्ताव में रोहिंग्या समेत सभी अल्पसंख्यकों पर अत्याचार रोकने और उन्हें न्याय दिलाने की मांग की गई है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में म्यांमार के राजदूत हाऊ डो सुआल ने प्रस्ताव पास करने की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह मानवाधिकार नियमों के खिलाफ है और भेदभावपूर्ण रवैये को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव म्यांमार पर राजनीतिक दबाव बनाने के लिए पेश किया गया है।
गौरतलब है कि म्यांमार एक बौद्ध बहुल्य देश है। यहां के रखाइन प्रांत में रोहिंग्या की आबादी बहुत ज्यादा है। साल 2017 में म्यांमार सरकार ने रोहिंग्या के खिलाफ सैन्य अभियान चलाने की अनुमति दी थी। इसके बाद रोहिंग्या समुदाय के लोग बड़ी संख्या में बांग्लादेश और भारत समेत अन्य देशों में पलायन कर रहे हैं।