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संयुक्त राष्ट्र ने 2020 का तय किया बजट, रोहिंग्या समुदाय पर अत्याचार के खिलाफ प्रस्ताव पास

Sat, 28 Dec 2019 11:41 AM IST
अनवर अंसारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
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संयुक्त राष्ट्र (फाइल फोटो)
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संयुक्त राष्ट्र महासभा ने शुक्रवार को 2020 के लिए लगभगग 21 हजार करोड़ रुपये (3.07 अरब अमेरिकी डॉलर) का अपना परिचालन बजट निर्धारित किया है। बजट में पहली बार सीरिया और म्यांमार में युद्ध अपराधों की जांच के लिए धनराशि का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही म्यांमार में रोहिंग्या मुस्लिमों पर अत्याचार और उनके मानवाधिकार उल्लंघन का प्रस्ताव भी पारित हुआ।

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यूएन के 193 सदस्य देशों में से 134 ने प्रस्ताव का समर्थन और नौ देशों ने विरोध किया। जबकि 28 देश वोटिंग में शामिल नहीं हुए। प्रस्ताव में रोहिंग्या समेत सभी अल्पसंख्यकों पर अत्याचार रोकने और उन्हें न्याय दिलाने की मांग की गई है। 

संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में म्यांमार के राजदूत हाऊ डो सुआल ने प्रस्ताव पास करने की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह मानवाधिकार नियमों के खिलाफ है और भेदभावपूर्ण रवैये को दर्शाता है।  उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव म्यांमार पर राजनीतिक दबाव बनाने के लिए पेश किया गया है।


गौरतलब है कि म्यांमार एक बौद्ध बहुल्य देश है। यहां के रखाइन प्रांत में रोहिंग्या की आबादी बहुत ज्यादा है। साल 2017 में म्यांमार सरकार ने रोहिंग्या के खिलाफ सैन्य अभियान चलाने की अनुमति दी थी। इसके बाद रोहिंग्या समुदाय के लोग बड़ी संख्या में बांग्लादेश और भारत समेत अन्य देशों में पलायन कर रहे हैं।

पिछले वर्ष से लगभग एक हजार करोड़ ज्यादा का बजट पास

अगले वर्ष का बजट 2019 से कुछ ज्यादा है। 2019 का बजट लगभग 20 हजार करोड़ रुपये (2.9 अरब अमेरिकी डॉलर) का था। राजनयिकों के मुताबिक बजट को संयुक्त राष्ट्र सचिवालय की ओर से चलाए जाने वाले अतिरिक्त मिशनों, मंहगाई और विनिमय दर समायोजन की वजह से बढ़ाया गया है।
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इनमें यमन में पर्यवेक्षक मिशन, हैती में स्थापित एक राजनीतिक मिशन, 2011 में गृह युद्ध के बाद से सीरिया में हुए अपराधों की जांच और म्यामांर में रोहिंग्या मुस्लिम अल्पसंख्यक पर 2017 की कड़ी कार्रवाई की जांच के लिए धनराशि शामिल हैं।

पहली बार इस परिचालन बजट में सीरिया और म्यामांर में अपराधों की जांच के लिए बजट का प्रावधान किया गया है। इसके लिए पहले स्वैच्छिक योगदान से धनराशि जुटाई जाती थी। अब इसे 2020 में संयुक्त राष्ट्र सचिवालय के बजट में स्थानांतरित किया जाएगा और इसके लिए 193 सदस्य देशों को अनिवार्य योगदान करना होगा।

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