एंटोनियो गुटेरेस, संयुक्त राष्ट्र महासचिव
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विश्व निकाय प्रमुख एंतोनियो गुटेरस ने दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में तत्काल सुधारों के लिए आगे आने को कहा। उन्होंने चेताया कि जो वैश्विक ताकतें आज विशेषाधिकारों से चिपकी रहेंगी, उन्हें भविष्य में इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। भारत दशकों से सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग कर रहा है, जिसमें इसके स्थायी और अस्थायी दोनों वर्गों का विस्तार शामिल है। गुटेरस ने इन्हीं बातों को 193 सदस्यीय महासभा में कहा।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के महासचिव ने अंतिम महासभा संबोधन में वैश्विक संकटों का उल्लेख करते हुए कहा, सुधार उन सभी वैश्विक संस्थानों में होना चाहिए जो आज की दुनिया को प्रतिबिंबित करते हों। गुटेरस बोले, 1945 के समस्या-समाधान से 2026 की समस्याएं हल नहीं होंगी। यदि संरचनाएं हमारी वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करती हैं, तो वे वैधता खो देंगी। यूएन महासचिव ने कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार उतना ही आवश्यक है, जितना कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों की शक्ति संरचनाओं को अद्यतन करना।
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सुधार महत्वपूर्ण नहीं अनिवार्य हैं
गुटेरस ने कहा, हमारी संरचनाएं इस बदलती दुनिया को प्रतिबिंबित करना चाहिए। इसीलिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय-व्यापारिक संस्थानों में सुधार न सिर्फ महत्वपूर्ण है, बल्कि यह अनिवार्य है। उन्होंने कहा, यही बात सुरक्षा परिषद पर भी लागू होती है। गुटेरेस ने इस बात पर जोर दिया कि सुधारों में सबसे आगे रहना उन लोगों के हित में है जिनके पास सबसे अधिक शक्ति है। हम सभी को बदलाव के लिए पर्याप्त साहसी होना चाहिए। दुनिया इंतजार नहीं कर रही, हमें भी नहीं करना चाहिए।
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यूएन चार्टर कोई ऐसा मेन्यू नहीं, जिसमें पसंद से नियम चुने जा सकें
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कुछ देशों द्वारा अंतरराष्ट्रीय कानून का खुलेआम उल्लंघन करने की निंदा करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर कोई ऐसा मेन्यू (व्यंजन सूची) नहीं है, जिसमें से अपनी पसंद का नियम चुना जा सके। गुटेरस ने कहा, जब नेता अपनी सुविधा के हिसाब से यह चुनते हैं कि किस नियम को मानना है और किसे नहीं तो वे दुनिया की व्यवस्था को कमजोर करते हैं और एक बेहद खतरनाक मिसाल कायम करते हैं।
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