संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने शनिवार को बताया कि इस साल ईरान और पाकिस्तान से कम से कम 12 लाख अफगानों को अफगानिस्तान लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा है। एजेंसी ने चेतावनी दी है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों की वापसी से अफगानिस्तान की नाजुक स्थिति और बिगड़ सकती है।
ईरान और पाकिस्तान ने 2023 में उन विदेशियों को बाहर करने के लिए अलग-अलग अभियान शुरू किए, जो उनके अनुसार देश में अवैध रूप से रह रहे थे। दोनों देशों ने समय सीमा तय करते हुए धमकी दी कि अगर वे वापस नहीं लौटे तो उन्हें निर्वासित कर दिया जाएगा। दोनों सरकारें उन अफगानों को निशाना बनाने से इनकार करती हैं, जो युद्ध, गरीबी या तालिबान शासन से बचने के लिए अपने वतन से भाग गए हैं।
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20 मार्च के बाद लौटे आधे से अधिक अफगान
शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र के उच्चायुक्त ने कहा कि जो 12 लाख अफगान वापस लौटे हैं, उनमें से आधे से अधिक 20 मार्च की समय सीमा के बाद ईरान से आए, जिसे सरकार ने तय किया था। इस दौरान उनसे कहा गया कि वे स्वेच्छा से देश छोड़ दें, नहीं तो उन्हें निष्कासन का सामना करना पड़ सकता है।
इस्राइल-ईरान युद्ध के कारण भी वापस गए अफगान
एजेंसी के अुसार, ईरान ने इस वर्ष 366,000 से अधिक अफगानों को निर्वासित किया है, जिनमें शरणार्थी और शरणार्थी जैसी स्थिति वाले लोग शामिल हैं। वहीं, इस्राइल के साथ ईरान के 12 दिनों के युद्ध के कारण भी लोग वापस चले गए हैं। सबसे अधिक वापसी 26 जून को हुई, जब एक दिन में 36,100 अफगान सीमा पार कर गए।
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महिलाएं और लड़कियां विशेष रूप से चिंतित
अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में UNHCR के प्रतिनिधि अराफात जमाल ने कहा कि अफगान परिवार एक बार फिर से उजड़ रहे हैं, वे बहुत कम सामान लेकर आ रहे हैं। वह इस बात से डरे हुए हैं कि एक ऐसे देश में उनका क्या होगा, जहां उनमें से कई ने कभी पैर भी नहीं रखा है। उन्होंने कहा कि महिलाएं और लड़कियां विशेष रूप से चिंतित हैं, क्योंकि उन्हें आवागमन की स्वतंत्रता, शिक्षा और रोजगार जैसे बुनियादी अधिकारों पर प्रतिबंधों का डर है।
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