विश्व निकाय ने स्पष्ट किया है कि उसे पूरा भरोसा है कि अमेरिका ने हथियारों की जो खेप जब्त की है उनमें कई का स्रोत ईरान है। साथ ही सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठान पर हुए हमले और वैश्विक हवाई अड्डे पर हुए हमले के पीछे भी ईरान का ही हाथ है। ये सारी जानकारी एक नई रिपोर्ट में बताई गई है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरस ने कहा कि अमेरिका ने नवंबर 2019 और फरवरी 2020 में जिन वस्तुओं को जब्त किया, उनमें से कुछ मिलती-जुलती चीजें सऊदी अरब पर 2019 में हुए मिसाइल व ड्रोन हमलों के दौरान भी मिली थीं।
गुटेरस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को सौंपी गई एक रिपोर्ट में कहा कि अमेरिका ने यमन के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र से जो चीजें बरामद की हैं वे न केवल ईरान की हैं, बल्कि हो सकता है कि उन्हें 2015 के ईरान परमाणु समझौते के तहत परिषद के संकल्पों से इतर असंगत तरीके से भेजा गया हो।
इस समझौते में ईरान को किसी प्रकार की एटमी, बैलेस्टिक मिसाइल सामग्री और हथियारों के लेनदेन पर भी प्रतिबंध लगाया जाना शामिल है। परिषद के प्रस्तावों पर अमल के लिए 30 जून को होने वाली चर्चा में संभवत: अमेरिका ईरान के खिलाफ यूएन के हथियार प्रतिबंध अनिश्चित काल तक बढ़ाने की मांग करे।
ईरान ने खारिज की यूएन की रिपोर्ट
संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट पर ईरान ने आपत्ति जताई है। यूएन में ईरान के मिशन ने कहा, ‘सऊदी अरब पर हमलों में हथियारों के इस्तेमाल या उनके कलपुर्जों के निर्यात में ईरान से संबंध तथा अमेरिका द्वारा कथित तौर पर जब्त किए गए हथियारों को ईरानी मूल का बताने संबंधी रिपोर्ट को हम सिरे से खारिज करते हैं।’ उसने कहा, ‘इस प्रकार की जटिल और संवेदनशील जांच की क्षमता, विशेषज्ञता और ज्ञान नहीं है।’