यूएनडीपी प्रशासक एखिम श्टाइनर का कहना है कि, 'यह रिपोर्ट रेखांकित करती है कि प्रवासन पूरे अफ्रीका में विकास के प्रगति से उपजी गूंज है, प्रगति जो असमान है और इतनी तेज नहीं है कि लोगों की आकांक्षाओं को पूरी कर सके। इस अध्ययन में अवसरों में अवरोध या विकल्प का अभाव मुख्य कारक के रूप में सामने आया है जो इन युवाओं के निर्णय को प्रभावित करता है।'
रिपोर्ट स्पष्ट तौर पर दर्शाती है कि प्रवासन के पीछे छिपी वजहों में सिर्फ नौकरी की तलाश नहीं है। ना ही सभी अनियमित प्रवासी अफ्रीका में गरीबी में जीवन गुजार रहे थे और ना ही उनकी शिक्षा का स्तर कम था। लोग अनियमित मार्गों से यात्राएं क्यों करते हैं और ऐसा करते समय वे क्या अनुभव करते हैं, यह रिपोर्ट उन कारणों पर प्रकाश डालती है। रिपोर्ट बताती है कि प्रवासियों का ‘मिशन’ अपने घर पर्याप्त धन भेजना है और ऐसा ना कर पाने में उन्हें शर्मिंदगी पैदा होती है जिसकी वजह से वे मुश्किलों के बावजूद यूरोप में काम करना जारी रखते हैं।
लगभग 53 फीसदी लोगों का कहना है कि यात्रा पूरी करने के लिए उन्हें अपने परिवार या मित्रों से सहारा मिला और 78 फीसदी लोग यूरोप पहुंचने के बाद अपने घर धन भेज रहे हैं। एक प्रवासी के रूप में महिलाओं व पुरुषों को अलग-अलग अनुभव होते हैं। अफ्रीका में लैंगिक स्तर पर वेतन में खाई है जिसका लाभ आम तौर पर पुरुषों को मिलता है। लेकिन यूरोप में स्थिति बदल जाती है और महिलाएं पुरुषों की तुलना में 11 फीसदी अधिक कमा रही हैं जबकि अफ्रीका में उनकी आय पुरुषों की तुलना में 26 फीसदी अधिक थी।
महिलाएं ज्यादा संख्या में यूरोप से अपने घर धन भेज रही हैं - वे महिलाएं भी जिनकी अभी आय नहीं है। लेकिन अपराध के विषय में महिलाएं अधिक संख्या में पीड़ित हैं। सर्वे किए जाने से पहले के छह महीनों में किसी अपराध का शिकार होने वाली महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में ज्यादा थी और उन्हें यौन हमलों का दंश भी झेलना पड़ा।
यूएनडीपी के मुताबिक यह रिपोर्ट अफ्रीका में अवसरों और विकल्पों का दायरा बढ़ाने और प्रवासन के अवसरों को अनियंत्रित से नियंत्रित करने की एक पुकार है। इसका लक्ष्य प्रवासन को ‘ग्लोबल कॉम्पैक्ट’ के अनुरूप सुरक्षित, सुव्यवस्थित और नियमित बनाना है।