UN Report On Xinjiang: United Nations High Commissioner for Human Rights Michelle Bachelet meets Chi
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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायोग की चीन के शिनजियांग प्रांत पर जारी रिपोर्ट पर दुनिया में बढ़ रहे ध्रुवीकरण का साफ असर दिखा है। ये रिपोर्ट उच्चायोग की प्रमुख मिशेल बैशलेट के कार्यकाल के आखिरी दिन जारी की गई। रिपोर्ट में जिस भाषा का इस्तेमाल किया गया, उससे चीन समर्थकों को इसकी साख पर सवाल उठाने का मौका मिला है। उधर पश्चिमी देशों ने रिपोर्ट को लेकर चीन विरोधी अपने प्रचार अभियान को और तेज कर दिया है।
आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन के शिनजियांग प्रांत में मानवाधिकारों का ऐसा हनन हुआ हो सकता है, जिसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन या मानवता के खिलाफ अपराध की श्रेणी में रखा जाए। ये रिपोर्ट 48 पेज की है। इसके साथ ही आयोग ने इस रिपोर्ट पर चीन के 131 पेज के पूरे जवाब को भी जारी कर दिया। अपने जवाब में चीन ने कहा है कि आयोग की रिपोर्ट दुष्प्रचार और चीन विरोधी ताकतों की तरफ से फैलाए गए झूठ पर आधारित है।
चीन का जवाब ‘शिनजियांग में आतंकवाद और चरमपंथ से संघर्षः सच और तथ्य’ शीर्षक से प्रकाशित हुआ है। चीन का यह पुराना रुख है कि शिनजियांग प्रांत में उसने आतंकवाद विरोधी कदम उठाए हैं, जिन्हें लेकर पश्चिमी देशों ने मानवाधिकारों के हनन और यहां तक कि नरसंहार के आरोप लगाए हैँ। इन कदमों में चरमपंथ प्रभावित लोगों के लिए ‘व्यावसायिक शिक्षण एवं प्रशिक्षण केंद्रों’ की स्थापना भी है, जिन्हें पश्चिमी देशों ने यातना शिविर बताया है। जवाबी हमला करते हुए चीन ने संयुक्त राष्ट्र से अमेरिका और कुछ पश्चिमी देशों की तरफ से किए गए ‘मानवाधिकार संबंधी विनाश और अनगिनत अपराधों’ की जांच कराने को कहा है।
कई विश्लेषकों और अधिकारियों ने इस बात पर हैरत जताई है कि बैशलेट ने रिपोर्ट जारी करने के लिए अपने कार्यकाल के आखिरी दिन का इंतजार किया। बैशलेट चिली की पूर्व राष्ट्रपति हैं। वहां पश्चिम समर्थित तानाशाह अगस्तो पिनोशे के दमन के दौर में खुद उन्हें जेल में डाला गया था। पिछले हफ्ते उन्होंने कहा था कि वे रिपोर्ट प्रकाशित करने की पूरी कोशिश कर रही हैं, लेकिन ऐसा हो पाएगा यह तय नहीं है। बैशलेट ने मई में शिनजियांग का दौरा किया था। तब उन्होंने कहा था कि उन्हें घूमने-फिरने की पूरी आजादी दी गई। उन्होंने कहा था कि मानवाधिकारों के मामले में चीन में समस्याएं हैं, लेकिन साथ ही उन्होंने मानव विकास के मानदंडों पर चीन की प्रगति की तारीफ भी की थी।
बैशलेट ने अब कहा है कि उन पर पश्चिमी देशों और चीन से इस रिपोर्ट को जारी करने या ना करने को लेकर भारी दबाव पड़ा। मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद को अपने आखिरी संबोधन में बैशलेट ने इस बात पर दुख जताया कि आज गोलबंदी की शिकार दुनिया में परिषद को बेहद कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा- ‘दुनिया में पड़ती दरार को रोकने के लिए हमें हर संभव कोशिश करनी चाहिए।’
विश्लेषकों के मुताबिक इस दरार का असर शिनजियांग रिपोर्ट और उस पर आई प्रतिक्रियाओं में साफ दिखा है। इससे साफ हुआ है कि मानवाधिकार जैसे बुनियादी सवाल पर भी पश्चिमी देश और चीन समर्थक खेमा बंट चुका है।