दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र के भारतीय शांति सैनिकों ने बाढ़ से बंद पड़े एक मुख्य मार्ग को फिर से खोल दिया है। इस रास्ते के खुलने से लाखों लोगों तक मदद पहुंच सकेगी। संयुक्त राष्ट्र ने इस काम पर सैनिकों की सराहना की और इसे इसे मानवता के लिए जरूरी बताया।
संयुक्त राष्ट्र ने दक्षिण सूडान में तैनात भारतीय शांति सैनिकों के प्रयासों की सराहना की है। इन सैनिकों ने पिछले साल बाढ़ से प्रभावित एक महत्वपूर्ण आपूर्ति मार्ग को फिर से खोला है। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि स्थानीय समुदायों की मदद करने में शांति मिशनों की भूमिका बहुत अहम है।
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महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने न्यूयॉर्क में एक मीडिया वार्ता के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दक्षिण सूडान के मुश्किल समय में एक उम्मीद जगाने वाली खबर है। अपर नाइल राज्य में भारतीय इंजीनियरिंग यूनिट के सैनिकों ने मालाकाल-रेंक मुख्य सप्लाई मार्ग के एक बड़े हिस्से को सफलतापूर्वक चालू कर दिया है। यह रास्ता पिछले साल आई बाढ़ के बाद से पूरी तरह बंद था।
उन्होंने कहा, सैनिकों ने बाढ़ के पानी के बीच से जमीन को फिर से निकाला और सड़क का नया ढांचा तैयार किया। अब अकोका-किलो 20-पालोइच-रेंक के रास्ते एक नया मार्ग बन गया है। इससे इलाके में लोगों का आना-जाना सुरक्षित होगा। साथ ही, इस रास्ते से जरूरतमंद लोगों तक खाना और दवाइयां जैसी मानवीय सहायता पहुंचाना बहुत आसान हो जाएगा।
दुजारिक ने कहा कि भारतीय सैनिकों की यह कोशिश दिखाती है कि शांति मिशन किस तरह स्थिरता बनाए रखने में मदद करते हैं। वे सबसे कठिन वातावरण में भी कमजोर नागरिकों तक जरूरी मदद पहुंचाने का काम कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र मिशन दक्षिण सूडान (UNMISS) ने भी सोशल मीडिया पर इस सफलता की जानकारी साझा की है। मिशन ने बताया कि नया रास्ता बनने से क्षेत्र में गतिशीलता बढ़ेगी।
बाढ़ की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल दक्षिण सूडान में हालात बहुत खराब थे। आठ राज्यों में करीब 13.5 लाख लोग बाढ़ की चपेट में आए थे। इस आपदा की वजह से लगभग 3 लाख 75 हजार 600 लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा था। ऐसे में इस मुख्य रास्ते का खुलना वहां के लोगों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। बता दें कि जनवरी 2026 तक, भारत UNMISS में सबसे अधिक सैनिक भेजने वाला देश था, जिसके 1,779 जवान इस शांति मिशन में तैनात थे।