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China: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की प्रमुख का चीन दौरा समाप्त, आतंकवाद रोधी नीतियों की समीक्षा करने का अनुरोध

Sat, 28 May 2022 11:09 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, गुआंगझोऊ

सार

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख ने कहा कि इस यात्रा ने मुझे चीन की स्थिति को बेहतर ढंग से समझने का अवसर प्रदान किया। इसने चीन के अधिकारियों को हमारी चिंताओं को बेहतर ढंग से समझने और उन नीतियों पर पुनर्विचार करने का मौका दिया जिसके बारे में हमें लगता है कि वे नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं।
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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख मिशेल बाचेलेट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख मिशेल बाचेलेट की छह दिवसीय चीन यात्रा शनिवार को पूरी हो गई। उन्होंने कहा कि मैंने बीजिंग से अनुरोध किया है कि वह अपनी आंतकवाद विरोधी नीतियों की समीक्षा करे। मानवाधिकार प्रमुख ने एक बयान में आतंकवाद व उग्रवाद से निपटने के लिए कानूनों और नीतियों के बारे में कुछ मानवाधिकार तंत्रों को लेकर भी चिंता साझा की। 

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बाचेलेट ने कहा, 'उग्रवाद के हिंसक कृत्यों का पीड़ितों समेत उन लोगों के जीवन पर गंभीर और डरावना असर पड़ता है, जिन्हें देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन यह जरूरी है कि आतंकवाद विरोधी प्रतिक्रियाओं का परिणाम मानवाधिकारों के उल्लंघन के रूप में हो।' उन्होंने कहा कि यह दौरा कोई जांच नहीं था, यह सीधी चर्चा करने का एक अवसर था।

उन्होंने कहा कि यह दौरा अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के तहत दायित्वों को पूरा करने में चीन का समर्थन करने और संवाद का मार्ग प्रशस्त करने का भी मौका था। उन्होंने कहा कि मैंने चीन के शिनजियांग क्षेत्र में उइगर और अन्य मुस्लिम समुदायों पर लागू किए गए आतंकवाग और कट्टरपंथ विरोधी कदमों के असर के बारे में चीनी अधिकारियों के सामने चिंता व्यक्त की है। 
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मानवाधिकार के लिए संयुक्त राष्ट्र की उच्चायुक्त के तौर पर 17 साल में चीन का पहली बार दौरा करने वालीं मिशेल बाचेलेट ने कहा कि मैंने नजरबंदी शिविरों की प्रणाली पर गौर करने के लिए स्वतंत्र न्यायिक निरीक्षण की कमी का उल्लेख किया है। विशेषज्ञों के अनुसार इन नजरबंदी शिविरों में दस लाख से अधिक उइगर और अन्य जातीय अल्पसंख्यकों को रखा गया है।

हांगकांग में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तारियां चिंताजनक
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख ने इस दौरान हांगकांग में कथित राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत अधिवक्ताओं, कार्यकर्ताओं और पत्रकारों की गिरफ्तारी पर चिंता व्यक्त की। चीन ने हांगकांग में एक जुलाई 2020 को यह कानून लागू किया था। चीन के इस तानाशाही कानून के तहत हांगकांग में दर्जनों पूर्व विपक्षी नेताओं और हाईप्रोफाइल पत्रकारों को हिरासत में लिया जा चुका है।

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