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राजनैतिक व्यवस्था में टूटते भरोसे को बहाल करने की पुकार

Mon, 28 Oct 2019 03:21 AM IST
Abhishek Singh यूएन हिंदी समाचार

सार

  • एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि लोग पीड़ा में हैं और अपनी आवाज सुनाना चाहते हैं
  • गुटेरेश ने विरोध प्रदर्शन में लोगों की जान जाने पर जताई चिंता
  • जनता और राजनैतिक व्यवस्था के बीच घटते भरोसे को बहाल करें नेता
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बोलिविया के ला पाज में सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी - फोटो : यूएन समाचार
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विस्तार
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न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि हर देश में स्थिति अलग है लेकिन कुछ ऐसे अंतर्निहित कारण हैं जिनसे राजनैतिक तंत्र और जनता के बीच सामाजिक अनुबंध को खतरा बढ़ रहा है।

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उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है लोगों और राजनीतिक व्यवस्था में भरोसे का अभाव है और यह खाई बढ़ रही है जिससे सामाजिक अनुबंध को खतरा बढ़ रहा है। दुनिया भर में विरोध प्रदर्शनों की बयार बह रही है। मध्य पूर्व से लातिन अमेरिका और कैरिबियाई क्षेत्र तक, और योरोप से अफ्रीका और एशिया तक। लोगों के जीवन में अशांति से शहरों के चौराहों और सड़कों पर शांति भंग हो रही है।

इससे पहले शुक्रवार को जिनीवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने मौजूदा और हाल के समय में बोलिविया, चिली, हॉंगकॉंग, इक्वाडोर, मिस्र, गिनी, हेती, इराक और लेबनान में विरोध प्रदर्शनों की ओर ध्यान आकृष्ट किया था।
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वर्ष 2019 में ही अल्जीरिया, होंडुरस, निकरागुआ, मलावी, रूस, सूडान, जिम्बाब्वे, फ्रांस, स्पेन और ब्रिटेन में भी प्रदर्शन हो चुके हैं।

कुछ विरोध प्रदर्शन आर्थिक मुद्दों जैसे बढ़ती महंगाई, लगातार कायम सामाजिक असमानता और ऐसे वित्तीय तंत्र की विजह से हुए हैं जिसमें सिर्फ कुलीन वर्ग को ही फायदा हो रहा है। लेकिन अन्य प्रदर्शनों के मूल में राजनीतिक मांगें हैं।

यूएन प्रमुख ने कहा कि लोग एक ऐसी व्यवस्था चाहते हैं जिसमें सभी के लिए समान सामाजिक, आर्थिक और वित्तीय प्रणाली हो और जो सभी के लिए काम करे। वे अपने मानवाधिकारों का सम्मान चाहते हैं और उनके जीवन पर प्रभाव डालने वाले फैसलों में अपनी आवाज सुनना चाहते हैं।

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उन्होंने ध्यान दिलाया कि दुनिया वैश्वीकरण और नई तकनीकों से आए बदलावों और उनकी चुनौतियों से जूझ रही है। इन बदलावों से समाजों में असमानताएं बढ़ी हैं। हर उस जगह जहां लोग प्रदर्शन नहीं भी कर रहे हैं वहां भी लोग दुखी हैं और अपनी आवाज सुनाना चाहते हैं।

महासचिव गुटेरेश ने विरोध प्रदर्शनों में हिंसा होने और लोगों की जान जाने पर चिंता भी जताई। उन्होंने रेखांकित किया कि सरकारों की यह जिम्मेदारी हैं वे अभिव्यक्ति की आज़ादी का सम्मान और शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने के अधिकार की रक्षा करें।

उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों को अधिकतम संयम बरतना होगा और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का पालन करना होगा।

यूएन प्रमुख ने प्रदर्शनकारियों से भी अपील की है कि उन्हें महात्मा गांधी, मार्टिन लूथर किंग और अहिंसा के अन्य प्रणेताओं से सबक लेना चाहिए।

हिंसा को किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता। मैं सभी नेताओं से आग्रह करता हूं कि वे वास्तविक लोगों की वास्तविक समस्याओं को सुनें।

न्यायसंगत वैश्वीकरण के निर्माण, सामाजिक जुड़ाव को मजबूत बनाने और जलवायु संकट से निपटने के लिए हमारी दुनिया को कार्रवाई और महत्वाकांक्षा की जरूरत है। टिकाऊ विकास लक्ष्यों और 2030 एजेंडा के मूल में यही है।

उन्होंने कहा कि एकजुटता और स्मार्ट नीतियों के जरिए नेता बता सकते हैं कि उन्हें मुद्दों की समझ हैं और इस तरह एक न्यायोचित विश्व की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
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