न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि हर देश में स्थिति अलग है लेकिन कुछ ऐसे अंतर्निहित कारण हैं जिनसे राजनैतिक तंत्र और जनता के बीच सामाजिक अनुबंध को खतरा बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है लोगों और राजनीतिक व्यवस्था में भरोसे का अभाव है और यह खाई बढ़ रही है जिससे सामाजिक अनुबंध को खतरा बढ़ रहा है। दुनिया भर में विरोध प्रदर्शनों की बयार बह रही है। मध्य पूर्व से लातिन अमेरिका और कैरिबियाई क्षेत्र तक, और योरोप से अफ्रीका और एशिया तक। लोगों के जीवन में अशांति से शहरों के चौराहों और सड़कों पर शांति भंग हो रही है।
इससे पहले शुक्रवार को जिनीवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने मौजूदा और हाल के समय में बोलिविया, चिली, हॉंगकॉंग, इक्वाडोर, मिस्र, गिनी, हेती, इराक और लेबनान में विरोध प्रदर्शनों की ओर ध्यान आकृष्ट किया था।
वर्ष 2019 में ही अल्जीरिया, होंडुरस, निकरागुआ, मलावी, रूस, सूडान, जिम्बाब्वे, फ्रांस, स्पेन और ब्रिटेन में भी प्रदर्शन हो चुके हैं।
कुछ विरोध प्रदर्शन आर्थिक मुद्दों जैसे बढ़ती महंगाई, लगातार कायम सामाजिक असमानता और ऐसे वित्तीय तंत्र की विजह से हुए हैं जिसमें सिर्फ कुलीन वर्ग को ही फायदा हो रहा है। लेकिन अन्य प्रदर्शनों के मूल में राजनीतिक मांगें हैं।
यूएन प्रमुख ने कहा कि लोग एक ऐसी व्यवस्था चाहते हैं जिसमें सभी के लिए समान सामाजिक, आर्थिक और वित्तीय प्रणाली हो और जो सभी के लिए काम करे। वे अपने मानवाधिकारों का सम्मान चाहते हैं और उनके जीवन पर प्रभाव डालने वाले फैसलों में अपनी आवाज सुनना चाहते हैं।