गुटेरस ने अपनी रिपोर्ट में नक्सलवादी हिंसा का भी संज्ञान लिया है और कहा है कि भारत सरकार के प्रयासों से इन संगठनों में बच्चाें को भर्ती करने, उनकी हत्या करने और अपंग बनाने की घटनाओं में कमी आई है। हालांकि उन्होंने खासतौर पर छत्तीसगढ़ और झारखंड में नक्सली संगठनों के चलते बच्चों तक शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं के नहीं पहुंचने पर चिंता जताई। उन्होंने 10 बच्चों को नक्सली विद्रोही समूहों के चंगुल से छुड़ाने के भारतीय पुलिस के प्रयासों की भी सराहना की।
- भारत जता चुका है रिपोर्ट पर पहले ही निराशा
भारत ने 2019 में बच्चे व सैन्य संघर्ष विषय पर संयुक्त राष्ट्र प्रमुख की रिपोर्ट पर गहरी निराशा जताई थी। भारत के एक वरिष्ठ राजनयिक ने संयुक्त राष्ट्र में पिछले साल अगस्त में रिपोर्ट पर निराशा जताते हुए कहा था कि तय हालात में अपनी समझ से राय बनाना एजेंडे को सिर्फ राजनीतिक रंग देता है। इसमें उन ऐसी परिस्थितियों को शामिल किया गया है, जो सशस्त्र संघर्ष या अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरे वाली नहीं हैं।