संयुक्त राष्ट्र ने अपनी 'डिकेड इन रिव्यू' यानी दशक की समीक्षा रिपोर्ट में पाकिस्तानी शिक्षा कार्यकर्ता और नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई को दुनिया की सबसे प्रसिद्ध किशोरी घोषित किया है। 2014 में मलाला को बच्चों के अधिकारों के प्रयास के लिए शांति का नोबेल पुरस्कार दिया गया था। वह सबसे कम उम्र में नोबेल पुरस्कार जीतने वाली शख्सियत हैं।
11 साल की उम्र में मलाला ने बीबीसी उर्दू सेवा के लिए एक गुमनाम ब्लॉग लिखना शुरू किया था। इस ब्लॉग में वो तालिबान शासन के दौरान अपने जीवन के बारे में लिखा करती थीं। मलाला महिला शिक्षा को लेकर शुरुआत से ही मुखर रही हैं, इसलिए तालिबान ने जान-बूझकर उन्हें निशाना बनाया।
पूरी तरह से फिट होने के बाद मलाला ने बच्चों की शिक्षा और उनके अधिकारों के बारे में बोलना शुरू किया। इसके बाद अपने पिता जियाउद्दीन के साथ मिलकर उन्होंने 'मलाला फंड' नाम की एक चैरिटी संस्था की स्थापना की जिसका मकसद दुनिया की हर लड़की के लिए शिक्षा की व्यवस्था करना है।
साल 2014 में मलाला नोबेल शांति पुरस्कार जीतने वाली सबसे युवा हस्ती बनीं। साथ ही पहली पाकिस्तानी भी जिसने ये अवॉर्ड जीता। फिलहाल वो ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ रही हैं और पढ़ाई के साथ अपने अभियान पर काम कर रही हैं।