यूक्रेन को लैपर्ड टैंक भेजने पर बंटा यूरोप
यूक्रेन को टैंक भेजने को लेकर यूरोपीय देश एकजुट नहीं दिख रहे हैं। जहां, एक तरफ ब्रिटेन चैलेंजर टैंक भेजने का एलान कर चुका है, वहीं जर्मनी का कहना है कि जब तक अमेरिका व दूसरे यूरोपीय देश यूक्रेन को टैंक नहीं भेजेंगे जर्मनी भी टैंक नहीं भेजेगा। हालांकि, इस बीच पोलैंड ने एलान किया है कि जर्मनी उसे लैपर्ड टैंक यूक्रेन को देने की इजाजत दे, तो वह बिना देर किए टैंक भेज देगा।
यहां तक कि पोलैंड के प्रधानमंत्री माटुस्ज मोरावीकी ने कहा कि अगर नाटो के अन्य सदस्य टैंक भेजने को तैयार हो जाएं, उन्हें लैपर्ड टैंक भेजने के लिए जर्मनी से इजाजत लेने की जरूरत नहीं होगी। वहीं, पेरिस में जर्मनी की विदेश मंत्री एनालेना बेयरबॉक ने रविवार को कहा कि अगर पोलैंड यूक्रेन को लैपर्ड टैंक भेजता है, तो जर्मनी कोई बाधा नहीं पैदा करेगा। उधर, रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि जो भी यूरोपीय देश यूक्रेन को टैंक भेजेंगे, उन्हें भी इसका बुरा नतीजा भुगतना होगा, क्योंकि अब यह सीधे तौर पर रूस के खिलाफ युद्ध का एलान होगा। एजेंसी
लैपर्ड क्यों अहम
टैंक खासतौर पर इस वजह से अहम है कि ये एक साथ एंटी-एयरक्राफ्ट गन और तोप की तरह काम कर सकते हैं। इन टैंकों में एंटी एयरक्राफ्ट मशीन गन, कोएक्सियल मशीन गन और स्मूदबोर गन लगी रहती है, जिससे ये रूसी टैंकों के साथ ही हवाई हमलों से एक-साथ निपट सकते हैं।
यूरोपीय विदेश मंत्रियों ने बनाया जर्मनी पर दबाव
यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान ब्रसेल्स में विदेश मंत्रियों ने जर्मनी पर यूक्रेन को बिना देर किए लैपर्ड टैंक देने का दबाव बनाया। लातिविया के विदेश मंत्री एडगर रिन्केविक्स ने कहा कि जर्मनी कह रहा है कि इससे रूस भड़क सकता है, लेकिन सोचने की बात यह है कि इससे क्या फर्क पड़ेगा, क्योंकि यूरोप पहले ही रूस के खिलाफ युद्ध लड़ रहा है। लिथुआनिया के विदेश मंत्री गब्रिलियस लैंडस्ब्रेगिस ने भी इस बात का समर्थन किया। एस्टोनियाई विदेश मंत्री उरमास रीनसालू ने कहा, जर्मनी यूरोप की इंजन है, लिहाजा जर्मनी की यह खास जिम्मेदारी बनती है कि वह अपनी क्षमता और प्रतिष्ठा के मुताबिक यूक्रेन की मदद करे।