अमेरिका में ब्रिटेन के पूर्व राजदूत पीटर मंडेलसन की अमेरिका में नियुक्ति से जुड़ी फाइलों को आज ब्रिटिश सरकार जारी करेगी। इस पूरे मामले ने पीएम स्टार्मर के लिए राजनीतिक मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। उन्होंने सितंबर में मंडेलसन को पद से हटा दिया था, लेकिन विपक्ष यह सवाल उठा रहा है कि एपस्टीन से संबंध सामने आने के बाद भी उन्हें पहले अमेरिका में इतना अहम राजनयिक पद क्यों दिया गया।
ब्रिटेन सरकार बुधवार को उन दस्तावेजों को सार्वजनिक करने जा रही है, जिनमें लेबर पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पीटर मंडेलसन को अमेरिका में राजदूत नियुक्त करने के फैसले से जुड़ी जानकारी है। यह फैसला उस समय लिया गया था जब अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत हुई थी। अब इन फाइलों को इसलिए जारी किया जा रहा है क्योंकि मंडेलसन के यौन अपराधी जफरी एपस्टीन से संबंधों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है और पुलिस इस मामले में संभावित भ्रष्ट्राचार की जांच कर रही है।
मंडेलसन ने सभी आरोपों से किया है इनकार
बता दें कि, ब्रिटिश सांसदों के दबाव के बाद प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर की सरकार को हजारों दस्तावेज सार्वजनिक करने पड़ रहे हैं। सरकार का कहना है कि इन फाइलों से यह भी सामने आ सकता है कि मंडेलसन ने अधिकारियों को एपस्टीन के साथ अपने संबंधों की वास्तविक सीमा के बारे में सही जानकारी नहीं दी थी। हालांकि मंडेलसन ने पहले किसी भी तरह की गलत हरकत से इनकार किया है और उन पर यौन दुराचार का कोई आरोप नहीं है।
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गिरफ्तारी के बाद बिना शर्त रिहा किए गए मंडेलसन
72 वर्षीय मंडेलसन को 23 फरवरी को लंदन स्थित उनके घर से 'पब्लिक ऑफिस में कदाचार' के संदेह में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में उन्हें बिना जमानत शर्तों के रिहा कर दिया गया। पुलिस की जांच अभी जारी है। सरकार का कहना है कि दस्तावेजों का पहला हिस्सा बुधवार दोपहर जारी किया जाएगा और बाकी फाइलें चरणबद्ध तरीके से सामने आएंगी। संसद की इंटेलिजेंस एंड सिक्योरिटी कमेटी इन दस्तावेजों की समीक्षा कर रही है, जबकि पुलिस ने सरकार से कहा है कि ऐसी फाइलें फिलहाल जारी न की जाएं जो जांच को प्रभावित कर सकती हैं।
इस विवाद को और हवा तब मिली जब अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जनवरी में जारी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में संकेत मिला कि 2008 की आर्थिक मंदी के समय ब्रिटेन के बिजनेस सेक्रेटरी रहते हुए मंडेलसन ने एपस्टीन को बाजार से जुड़ी संवेदनशील सरकारी जानकारी भेजी थी। इन दस्तावेजों में यह भी संकेत मिला कि उन्होंने बैंकर्स के बोनस पर लगाए गए टैक्स को कम कराने के लिए सरकार के अन्य सदस्यों से पैरवी करने की बात एपस्टीन से कही थी।