यमन के हूती विद्रोहियों के बढ़ते मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच ब्रिटेन ने सऊदी अरब को सीमित सैन्य सहायता देने का फैसला किया है। आरएएफ का एक वॉयजर विमान सऊदी विमानों को हवा में ईंधन उपलब्ध कराएगा। यह व्यवस्था कुछ हफ्तों के लिए होगी और रक्षात्मक अभियानों तक सीमित रहेगी। इस कदम के पीछे सऊदी सुरक्षा और तेल आपूर्ति के रास्तों को खुला रखने की चिंता बताई गई है।
ब्रिटेन ने यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के बढ़ते हमलों के बीच सऊदी अरब को सीमित सैन्य मदद देने का फैसला किया है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने सोमवार को बताया कि रॉयल एयर फोर्स यानी आरएएफ सऊदी अरब के विमानों में हवा में ही ईंधन भरने की सुविधा देगा। यह व्यवस्था कुछ हफ्तों के लिए होगी और हालात को देखते हुए इसकी समीक्षा की जाएगी।
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ब्रिटेन को सऊदी की मदद की जरूरत क्यों पड़ी?
यमन में हूतियों और सऊदी समर्थित सरकार के बीच संघर्ष फिर तेज हो गया है। हूती विद्रोही सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन से हमले कर रहे हैं। शनिवार को सऊदी राजधानी रियाद को निशाना बनाकर भी हमला किया गया था, जिसे बीच में ही रोक दिया गया। हूतियों ने लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में सऊदी शिपिंग के खिलाफ नाकाबंदी का एलान भी किया है।
ब्रिटेन आरएफ के जरिए सऊदी विमानों को हवा में ईंधन भरने की सुविधा देगा। यह सहायता शुरुआती तौर पर कुछ हफ्तों के लिए होगी और इसकी समीक्षा की जाएगी।
आरएएफ का एक वॉयजर विमान सऊदी विमानों को ईंधन देने के लिए इस्तेमाल होगा। ब्रिटिश अधिकारियों के मुताबिक विमान सऊदी के ‘रक्षात्मक’ अभियानों में मदद करेगा।
हूतियों ने रियाद समेत सऊदी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। हूतियों ने लाल सागर और बाब अल-मंदेब में सऊदी जहाजों को निशाना बनाने की बात कही है। सऊदी अरब ने अपने सहयोगी देशों से हवाई रक्षा सहायता देने का अनुरोध किया है।
लाल सागर और बाब अल-मंदेब इतना अहम क्यों है?
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हूतियों ने सऊदी से जुड़े जहाजों और सऊदी अरब के भीतर तेल प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाया है। सऊदी अरब दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक देश है। इसी बीच हूतियों ने यमन में आगे बढ़ते हुए इस महीने की शुरुआत में महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर मोक्का और लाल सागर के कुछ अहम द्वीपों पर कब्जा कर लिया। इससे उन्हें बाब अल-मंदेब से गुजरने वाले जहाजों पर नजर रखने में मदद मिल सकती है। इस रास्ते से सामान्य तौर पर दुनिया के करीब 12 प्रतिशत व्यापार की आवाजाही होती है।
ब्रिटेन इस मदद को कैसे देख रहा है?
प्रधानमंत्री बर्नहम ने कहा कि ब्रिटेन यह कदम अपने और पूरे क्षेत्र के हितों को सुरक्षित रखने के लिए उठा रहा है। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब हमलों का सामना कर रहा है और आगे और व्यवधान की आशंका है। ब्रिटेन के मुताबिक तेल की आपूर्ति के रास्तों को खुला रखना जरूरी है। ब्रिटेन ने हूती हमलों की निंदा करते हुए क्षेत्रीय स्थिरता, नागरिकों की सुरक्षा और मानवीय सहायता की पहुंच बनाए रखने के लिए सहयोगियों के साथ काम करने की बात कही है।
अमेरिका और दूसरे देशों का रुख क्या है?
अमेरिका ने बाइडन और ट्रंप प्रशासन के दौरान हूतियों के खिलाफ बमबारी की थी, लेकिन इस बार वह सैन्य रूप से शामिल होने में रुचि नहीं दिखा रहा है। ब्रिटेन और सऊदी अरब के बीच पहले से करीबी रक्षा साझेदारी है। एपी की पिछले सप्ताह की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब ने फ्रांस, ब्रिटेन, पाकिस्तान और मिस्र समेत अपने सहयोगियों से क्षेत्र में हवाई रक्षा सहायता तैनात करने का अनुरोध किया था, ताकि हूतियों और अन्य ईरान समर्थित समूहों की मिसाइलों और ड्रोन से बचाव किया जा सके।