ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने 140 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठी महिला से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने महिला को आश्वासन दिया कि वह उनके बेटे की रिहाई के लिए मिस्र सरकार पर दबाव बनाएंगे।
एक बयान में रविवार को स्टार्मर ने पुष्टि की कि उन्होंने लैला सौइफ से मुलाकात की और उनसे कहा कि वह उनके बेटे बेटे अला अब्देल-फत्तह कि रिहाई के लिए जो कुछ भी कर सकते हैं, वो करेंगे। अला के पास ब्रिटेन और मिस्र की दोहरी नागरिकता है, जो सोशल मीडिया पर गलत खबरें फैलाने के आरोप में पांच साल से मिस्र की जेल में बंद हैं।
स्टार्मर ने कहा, हम इस मामले को मिस्र सरकार के साथ शीर्ष स्तर पर उठाना जारी रखेंगे और रिहाई के लिए दबाव बनाएंगे। परिवार के एक सदस्य ने बताया कि अला की मां से स्टार्मर की मुलाकात शुक्रवार सबुह 10 डाउनिंग स्ट्रीट पर प्रधानमंत्री कार्यालय के अंदर हुई।
25 किलोग्राम कम हुआ महिला का वजन
लैला सौइफ (68 वर्षीय) 29 सितंबर से भूख हड़ताल पर हैं। वह हर्बल चाय, ब्लैक कॉफी और रिहाईड्रेशन साल्ट के अलावा कुछ भी सेवन नहीं कर रही हैं। चार महीने से ज्यादा समय के बाद सौइफ का वजन करीब 25 किलोग्राम कम हो गया है।
महिला ने पहले विदेश मंत्रालय से लगाई थी गुहार
अपने बेटे की रिहाई के लिए अभियान को वह दिसंबर में सीधे विदेश मंत्रालय तक ले गईं, ताकि अधिकारी इस मुद्दे पर ध्यान दें। इसके बाद वह मंत्रालय के सामने हर हफ्ते डेरा डाले रहीं। लेकिन जनवरी के मध्य तक जब कोई नतीजा नहीं निकला तो वह 10 डाउनिंग स्ट्रीट में स्टार्मर के कार्यालय के गेट पर चली गईं। इस महीने की शुरुआत में उन्होंने कहा, अधिकांश माएं अपने बच्चों तो बचाने के लिए अपनी जान तक को जोखिम में डाल देती हैं, लेकिन ये अलग-अलग तरीकों से हो सकता है। अगर उनके बच्चे को सच में खतरा हो, तो वे मरने के लिए भी तैयार रहती हैं।
कौन हैं अला अब्देल-फत्तह
अला (43 वर्षीय) मिस्र में जाने-माने लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ता हैं, जो 2011 के उस विद्रोह में भी शामिल थे, जिसने पूर्व राष्ट्रपति होस्नी मुबारक को सत्ता से हटा दिया था। उनका हालिया अपराध एक उस फेसबुक पोस्ट को लाइक करना था, जिसमें मिस्र की जेलों में होने वाले अत्याचारों का विवरण था। उन्हें 2019 में हिरासत में लिया गया था और अदालत ने उन्हें पांच साल की सजा सुनाई थी। लेकिन मिस्र के अधिकारियों ने उनकी रिहाई की तारीख पर उन्हें छोड़ने से इनकार किया और उन्हें तीन जनवरी 2027 तक हिरासत में रखने का आदेश दिया है।