ब्रिटेन ने शरण नीति में सख्त बदलाव किया है। प्रधानमंत्री स्टार्मर और गृह मंत्री महमूद ने संसद में नए नियम पेश किए, जिनमें शरणार्थियों के लिए अस्थायी दर्जा, 20 साल तक सेटलमेंट की अवधि और अवैध लौटने वाले देशों के लिए वीज़ा पेनल्टी शामिल है। सरकार का कहना है कि इससे अवैध प्रवास रोका जाएगा और असली शरणार्थियों के लिए सुरक्षित रास्ते सुनिश्चित होंगे।
ब्रिटेन की शरण नीति में बड़ा बदलाव करते हुए प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर और गृह मंत्री शबाना महमूद ने संसद में नए, कड़े नियम पेश किए हैं। इसके तहत अस्थायी शरण 20 साल तक सेटलमेंट की अवधि और अवैध लौटने वालों के लिए देशों पर वीजा पेनल्टी जैसी सख्त मेडिडास लागू होंगी। मामले में सरकार का कहना है कि इससे अवैध प्रवास रोका जाएगा और असली शरणार्थियों के लिए सुरक्षित, न्यायपूर्ण रास्ते खुलेंगे।
स्टार्मर ने कहा कि मौजूदा सिस्टम मानव तस्करी को बढ़ावा देता है और कई लोग, जो कानूनी तौर पर ब्रिटेन आते हैं, बाद में शरण लेने की कोशिश करने लगते हैं। उनके मुताबिक, अगर चैनल पार करके आने वालों की संख्या कम करनी है और शरण प्रणाली को न्यायपूर्ण बनाना है, तो कड़े नियम जरूरी हैं।
डेनमार्क जैसी मॉडल कैसे अपनाएगा ब्रिटेन?
संसद में बयान देते हुए गृह मंत्री शबाना महमूद ने कहा कि यूके अब डेनमार्क जैसी सख्त मॉडल को अपनाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अब सिर्फ आने वालों की संख्या कम करना काफी नहीं है, जिन्हें रहने का अधिकार नहीं है उनकी वापसी भी जरूरी है। उन्होंने बताया कि हाल के महीनों में कुछ असफल शरण मांगने वालों को स्वैच्छिक रूप से सीरिया भेजा गया है। महमूद ने घोषणा की कि अंगोला, कांगो (डीआरसी) और नामीबिया को पहली बार वीज़ा पेनल्टी वाली सूची में रखा गया है। बाद में और देशों को भी इसमें जोड़ा जाएगा।