ब्रिटेन की एक अदालत ने दक्षिण पूर्व इंग्लैंड में भारतीय मूल के व्यापारी को 12 महीने कारावास की सजा सुनाई है। व्यापारी को कोरोना लॉकडाउन से निपटने के लिए दिए गए ब्याज मुक्त ऋण के दुरुपयोग का दोषी पाया गया है।
58 वर्षीय व्यापारी कुलविंदर सिंह सिद्धू ने 2020 में वित्तीय सहायता योजना के तहत बाउंस बैंक लोन लिया था और उन्होंने इसका दुरुपयोग किया। व्यापारी को यूके कंपनी अधिनियम और धोखाधड़ी अधिनियम के तहत अपराधों के लिए दोषी माना गया है।
2010 से ढुलाई कंपनी में हैं निदेशक
जानकारी के मुताबिक, भारतीय मूल के कुलविंदर सिंह 2010 से स्टैनवेल स्थित एक ढुलाई कंपनी वेविलेन लिमिटेड के निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। जांच में सामने आया है कि 50,000 पाउंड का ऋण प्राप्त करने के लिए तुरंत बाद उन्होंने कंपनी को भंग कर दिया और लोन की धनराशि को अपने व्यक्तिगत खाते में स्थानांतरित कर दिया।
नौ जून, 2020 को लोन के लिए किया था आवेदन
कोरोना महामारी के दौरान यूके सरकार की बाउंस बैक लोन योजना के तहत, महामारी से प्रभावित व्यवसाय अधिकतम 50,000 पाउंड तक का ब्याज-मुक्त करदाता-समर्थित ऋण ले सकते थे। सिद्धू ने नौ जून, 2020 को लोन के लिए आवेदन किया, जिसके बाद धनराशि उनके खाते में भेज दी गई। 26 जून 2020 को, सिद्धू ने यूके के कंपनी हाउस के साथ व्यापार भंग करने के लिए कागजी कार्रवाई दायर की। कंपनी को अक्तूबर 2020 में भंग कर दिया गया था।
छह साल के लिए अयोग्य हुआ भारतीय मूल का व्यापारी
यूके की गिल्डफोर्ड क्राउन कोर्ट ने सिद्धू को दोषी ठहराया और उसे जेल की सजा सुनाई गई। इसके साथ ही कोर्ट ने 50,000 पाउंड की जब्ती का आदेश भी दिया, जिसका पूरा भुगतान किया जा चुका है। हिरासत की सजा के अलावा, सिद्धू को कंपनी के निदेशक के रूप में छह साल के लिए अयोग्य ठहराया गया है।