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UK: ब्रिटेन में भी पुरुष-महिलाओं के वेतन में अंतर, मौजूदा रफ्तार रही तो 30 वर्ष बाद खत्म हो सकेगी असमानता

Mon, 16 Feb 2026 05:04 AM IST
निर्मल कांत अमर उजाला नेटवर्क, लंदन।

सार

UK: ब्रिटेन में पुरुषों और महिलाओं के वेतन में औसत 12.8 प्रतिशत का अंतर है, जो महिलाओं के लिए साल के करीब 47 दिन बिना वेतन काम करने के बराबर है और अगर सुधार की मौजूदा गति जारी रही, तो लिंग के आधार पर वेतन में अंतर को पूरी तरह पाटने में करीब 30 साल लगेंगे। यह असमानता विशेष रूप से फाइनेंस और इंश्योरेंस उद्योग में सबसे ज्यादा है। पढ़ें रिपोर्ट-
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पुरुष और महिलाओं के वेतन में अंतर (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : फ्रीपिक
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विस्तार
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दुनिया के सबसे विकसित देशों में शामिल ब्रिटेन में भी पुरुषों और महिलाओं के वेतन के बीच खाई अब तक पाटी नहीं जा सकी है। ट्रेड्स यूनियन कांग्रेस (टीयूसी) ने आधिकारिक वेतन आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर चेतावनी दी है कि यदि सुधार की मौजूदा गति बनी रही, तो जेंडर पे गैप को पूरी तरह खत्म होने में अभी करीब 30 साल और लगेंगे यानी वर्ष 2056 तक। यह स्थिति ऐसे समय सामने आई है, जब जीवन यापन की बढ़ती लागत पहले ही कामकाजी महिलाओं पर अतिरिक्त दबाव बना रही है।
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टीयूसी के मुताबिक, पुरुषों और महिलाओं की औसत कमाई में फिलहाल 12.8 प्रतिशत का अंतर है, जो सालाना करीब 2,548 ब्रिटिश पाउंड स्टर्लिंग के बराबर बैठता है। यूनियन का कहना है कि इस असमानता का मतलब यह है कि एक औसत महिला कर्मचारी साल के 47 दिन प्रभावी रूप से बिना वेतन काम करती है। जेंडर पे गैप यह मापता है कि एक ही उद्योगों में काम करने वाले पुरुषों और महिलाओं को औसतन कितना अलग वेतन मिलता है। ब्रिटेन में 250 से ज्यादा कर्मचारियों वाले नियोक्ताओं के लिए अपने पे डेटा की रिपोर्टिंग अनिवार्य है। टीयूसी के विश्लेषण के अनुसार यह अंतर सबसे ज्यादा फाइनेंस और इंश्योरेंस उद्योग में है, जहां जेंडर पे गैप 27.2 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसके मुकाबले लीजर सर्विस सेक्टर में यह केवल 1.5 प्रतिशत दर्ज किया गया। हालांकि शिक्षा, स्वास्थ्य और सोशल केयर जैसे क्षेत्रों में महिलाएं बहुसंख्यक कार्यबल हैं, फिर भी यहां भी वेतन अंतर बना हुआ है।

50–59 आयु वर्ग में सबसे बड़ा अंतर
टीयूसी का कहना है कि जेंडर पे गैप 50 से 59 साल की उम्र के कर्मचारियों में सबसे ज्यादा है। यूनियन के मुताबिक इसकी एक बड़ी वजह यह है कि कई महिलाएं लंबे समय तक करियर रोकती हैं या अपनी महत्वाकांक्षाएं और आय घटाती हैं, ताकि वे देखभाल संबंधी जिम्मेदारियों को प्राथमिकता दे सकें। वेतन अंतर को पाटने के लिए टीयूसी ने फ्लेक्सिबल वर्किंग की बेहतर सुविधा और चाइल्डकेयर तक आसान पहुंच की मांग की है। इसके अलावा आने वाले समय में नियोक्ताओं को यह भी प्रकाशित करना होगा कि वे जेंडर पे गैप कम करने के लिए क्या योजनाएं बना रहे हैं।
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शिक्षा में 17, स्वास्थ्य में 12.8% कम
शिक्षा क्षेत्र में यह वेतन का 17% और हेल्थ व सोशल केयर में 12.8% है। टीयूसी के जनरल सेक्रेटरी पॉल नॉवाक ने कहा, पुरुषों की तुलना में महिलाएं साल का पहला करीब डेढ़ महीना प्रभावी रूप से मुफ्त में काम करती हैं। नॉवाक ने हाल में लागू हुए एम्प्लॉयमेंट राइट्स एक्ट को वेतन समानता की दिशा में एक अहम कदम बताया, लेकिन साथ ही जोर दिया कि सरकार को पेड पैरेंटल लीव तक पहुंच बढ़ानी चाहिए ताकि माएं और पिता देखभाल की जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से साझा कर सकें।

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