लंदन की हाईकोर्ट ने शुक्रवार को फरार हीरा व्यापारी नीरव मोदी की बैंक ऑफ इंडिया के बकाया ऋण मामले में ट्रायल स्थगित करने की याचिका खारिज कर दी। मोदी ने अपने स्वास्थ्य कारणों गंभीर दृष्टि दोष, क्लिनिकल डिप्रेशन और जेल की सीमाओं को आधार बनाकर ट्रायल में स्थगन की मांग की थी।
54 वर्षीय मोदी, जो भारत में अनुमानित 2 अरब डॉलर के PNB धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रत्यर्पण का सामना कर रहे हैं, ने नॉर्थ लंदन की HMP पेंटनविल जेल से वीडियो लिंक के जरिए 8 मिलियन डॉलर के बीओआई केस के प्री-ट्रायल रिव्यू में हिस्सा लिया।
23 मार्च से शुरू होगा ट्रायल
विशेष जज साइमन टिंक्लर ने कहा कि आरोपी को कोई महत्वपूर्ण नुकसान नहीं होगा और आठ दिन के ट्रायल में वह समान अवसर के साथ अपनी दलील पेश कर सकते हैं। नीरव मोदी की अर्जी एक देर करने की पुरानी रणनीति का हिस्सा प्रतीत होती है। ट्रायल 23 मार्च से शुरू होगा।
नीरव मोदी के वकील जेम्स किनमैन ने बताया कि मोदी को अक्टूबर में HMP थेमसाइड से पेंटनविल जेल स्थानांतरित किए जाने के बाद अदालत दस्तावेज़ों तक पहुँच में कठिनाई हो रही है। नीरव मोदी अपनी दृष्टि का लगभग 60% खो चुके हैं और उनका अवसाद उन्हें लंबे समय तक ध्यान केंद्रित करने में बाधित करता है।
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बैंक ऑफ इंडिया के वकील टॉम बीस्ले ने इसे आखिरी मिनट की अर्जी करार देते हुए कहा कि इससे मोदी की बचाव क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। जज ने चेताया कि बिना ठोस बदलाव के भविष्य में ऐसी अर्जी अदालत प्रक्रिया का दुरुपयोग हो सकती है। कोर्ट ने नीरव मोदी द्वारा व्यक्तिगत गारंटी पर बाद में दावा करने के प्रयास को भी खारिज कर दिया। यह गारंटी दुबई की कंपनी फायरस्टार डायमंड एफजेडई के लिए लिए गए ऋण से संबंधित है। नीरव मोदी इस ट्रायल में लिटिगेंट इन पर्सन के रूप में खुद पेश होंगे और मामले के एकमात्र तथ्य साक्षी होंगे। साथ ही, दो भारतीय कानून विशेषज्ञ तकनीकी पहलुओं पर साक्ष्य प्रदान करेंगे।
मोदी मार्च 2019 से लंदन में प्रत्यर्पण वारंट के तहत जेल में हैं और अब तक कई अपील और जमानत प्रयास विफल रहे हैं। दिसंबर 2024 में हाई कोर्ट ने उनके प्रत्यर्पण मामले को फिर से खोलने के आवेदन पर विचार किया था, जिसमें उन्होंने भारत में उत्पीड़न का जोखिम बताया था।
भारत में उनके खिलाफ तीन आपराधिक मामले चल रहे हैं –
- PNB धोखाधड़ी में CBI केस
- मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित ED केस
- साक्ष्य और गवाहों में हस्तक्षेप का तीसरा मामला
अप्रैल 2021 में तत्कालीन यूके गृह सचिव प्रीति पटेल ने आरोप सिद्ध होने के बाद उनके प्रत्यर्पण का आदेश दिया था।