ब्रिटेन पर नए सिरे से मंडराते कोरोना वायरस महामारी के खतरे का गहरा असर वहां के आम लोगों के मनोविज्ञान पर हुआ है। इसलिए कई गतिविधियों की हालांकि अब सरकार ने इजाजत दे दी है, लेकिन उनमें अब लोगों की भागीदारी फिर घटने लगी है। मंगलवार को ब्रिटेन की सरकार ने स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति के बारे में आंकड़े जारी किए, तो उससे सामने आया कि पिछले हफ्ते रिकॉर्ड संख्या में छात्र स्कूलों से गैर-हाजिर रहे।
ब्रिटेन में पिछले मार्च में स्कूल खोल दिए गए थे। महामारी का असर घटने के साथ उनमें छात्रों की मौजूदगी बढ़ने लगी थी। लेकिन पिछले हफ्ते इसमें रिकॉर्ड गिरावट आई। पिछले कुछ हफ्तों के दौरान ब्रिटेन में कोरोना वायरस के डेल्टा वैरिएंट के फैलने की खबरें सुर्खियों में रही हैं। जानकारों का कहना है कि स्कूलों में घटी हाजिरी की वजह डेल्टा वैरिएंट से फैला भय ही है।
ब्रिटेन के शिक्षा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इंग्लैंड में 24 से 29 जून वाले हफ्ते में पौने चार लाख छात्र कोरोना संबंधी कारणों से स्कूलों से गैर- हाजिर रहे। यानी तकरीबन पांच फीसदी छात्र स्कूल नहीं आए। आंकड़ों के विश्लेषण से जाहिर हुआ है कि प्राइमरी स्कूलों में कोरोना संबंधी कारणों से गैर हाजिरी 4.5 फीसदी रही। जबकि सेकंडरी स्कूलों में (जिनमें 16 से 18 वर्ष उम्र के छात्र आते हैं) ऐसी गैर हाजिरी 6.2 फीसदी रही।
जानकारों के मुताबिक स्कूलों में बढ़ी गैर हाजिरी का कारण सिर्फ भय नहीं है। बल्कि बड़ी संख्या में छात्र कोरोना संक्रमण से सीधे प्रभावित हुए हैँ। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक दो लाख 79 हजार छात्र (कुल गैर हाजिर छात्रों के बीच लगभग दो तिहाई) इसलिए स्कूल नहीं आए, क्योंकि किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आ जाने के कारण उन्होंने खुद को आइसोलेशन में डाल रखा है। सरकारी प्राइमरी, सेकंडरी और स्पेशल स्कूलों 0.2 फीसदी छात्र इस वक्त खुद कोरोना संक्रमण से पीड़ित हैँ।
कोरोना का असर सिर्फ छात्रों पर ही नहीं है। ताजा आंकड़ों से पता चला कि सरकारी स्कूलों के 2.5 फीसदी शिक्षक भी कोविड-19 संबंधी कारणों से 24 जून से 29 जून के बीच स्कूल नहीं पहुंचे। ब्रिटेन के कुछ इलाकों में अभी कोरोना संक्रमण का असर ज्यादा गंभीर है। अखबार डेली पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक उत्तरी वेल्श इलाके में स्कूली छात्रों के कोरोना संक्रमित होने के मामले तेजी से बढ़े हैँ। वहां संक्रमण की ये दर पिछले दिसंबर से भी ज्यादा हो गई है, जब ब्रिटेन कोरोना महामारी की दूसरी लहर से जूझ रहा था। इस रिपोर्ट के मुताबिक इंग्लैंड के डरहम इलाके में सिर्फ एक दिन में लगभग 400 छात्रों के कोरोना संक्रमित होने की खबर आई।
ब्रिटेन में पिछले जनवरी में जब कोरोना संक्रमण लेवल- 5 का खतरा बताया गया था, तब स्कूल बंद कर दिए गए थे। लेकिन मार्च आते-आते इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्श सभी जगहों पर स्कूल खुल गए। ब्रिटेन में अभी नाबालिग बच्चों को कोरोना के टीकाकरण की इजाजत नहीं दी गई है, जबकि यूरोप के कुछ देशों में 12 से 17 वर्ष उम्र के किशोरों को भी टीका लगाया जा रहा है। अब स्कूलों में बढ़े खतरे को देखते हुए ये संभावना जताई गई है कि जल्द ही ब्रिटिश सरकार भी इस बारे में फैसला करेगी।