हालांकि अभी तक कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है, लेकिन विपक्षी नेताओं और उइगरों को डर है कि बीजिंग टीकाकरण का इस्तेमाल प्रत्यर्पण संधि के अमल में आने के लिए कर रहा है। इस संधि पर सालों पहले हस्ताक्षर किए गए थे, लेकिन दिसंबर में अचानक चीन ने इसकी पुष्टि कर दी और इस महीने के शुरू होते ही तुर्की के सांसदों के सामने इसे रखा जा सकता है।
उइगरों का कहना है कि विधेयक के पारित होकर कानून बनते ही यह उनके लिए जीवन भर का दु:स्वप्न की तरह हो जाएगा। निर्वासन केंद्र में रहने से तो बेहतर है कि वह अपने देश ही चले जाएं। बता दें कि चीन में लाखों उइगर और दूसरे मुस्लिम अल्पसंख्यकों को जेल और नजरबंदी शिविरों में रखा गया है। चीन इसे आतंकवाद निरोधी कार्रवाई बताता रहा है, जबकि अमेरिका ने इसे नरसंहार की संज्ञा दी है।
मेत्सेदी की पत्नी मेलिकी कहती हैं कि उन्हें निर्वासित होने का डर है। आंखों में आंसू लिए वह कहती हैं कि चीनी प्रतिशोध की वजह से वह अपना उपनाम नहीं बताती हैं। उन्हें अपने पति के मानसिक स्वास्थ्य की चिंता है। दिसंबर में चीनी टीके की पहली खेप पकड़े जाने पर ऐसे सौदे का संदेह पैदा हुआ। हालांकि अधिकारियों ने परमिट के मुद्दों की उलझन को इसका जिम्मेदार ठहराया था।
लेकिन अब भी तुर्की के मुख्य विपक्षी दल के एक विधायक यिलदिरीम काया ने कहा कि चीन ने जनवरी के अंत तक वादा किए गए 30 लाख खुराक में से केवल एक तिहाई दी है। तुर्की अपनी आबादी में वायरस का खतरा कम करने के लिए चीन के सिनोवैक वैक्सीन पर काफी हद तक निर्भर है। बता दें कि यहां लगभग 2.5 लाख संक्रमित हैं और 26,000 लोगों की मौत हो गई है।
काया ने कहा कि यह देरी कोई सामान्य नहीं है। हमने वैक्सीन के लिए भुगतान किया है। उन्होंने सवाल किया कि चीन क्या तुर्की को ब्लैकमेल कर रहा है? काया ने कहा कि उन्होंने औपचारिक रूप से तुर्की सरकार से चीन के दबाव के बारे में पूछा, लेकिन अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
वहीं दूसरी ओर चीन ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा कि वैक्सीन और संधि के बीच में कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि आपकी अटकलें निराधार हैं।
चीन के विदेश मंत्री मेवलुत कैवुसोग्लू ने भी बीते दिसंबर में कहा था कि वैक्सीन की खेप भेजने में देरी का उइगरों से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि हम राजनीति हितों के लिए उइगरों को इस्तेमाल नहीं करते हैं। बल्कि हम उनके मानवाधिकारों की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।